Sunday, 16 April 2017

Responsibility of teacher

अगर सभी महापुरुषों की जयन्तियों में विद्यालय खोले जाते, उनके जीवन के बारे में अपनी आने वाली पीढ़ी को ज्ञान हस्तांतरित किया जाये तो इसमें बुरा ही क्या है? रही बात १२० दिन विद्यालय खुलने की , तो बता दूं कि १२० दिन भी ही विद्यालय खोलकर पढ़ाई नहीं होती है।  विद्यालय खुलने का समय 8:30am है। कुछ विद्यालयों​ को छोड़कर शिक्षक के विद्यालय पहुंचने का समय 9 am से 10  am के बीच रहता है। शिक्षण कार्य बंद होने का समय 3 pm है। विद्यालय 2:30 से 3 pm के मध्य हरहाल में बंद हो जाते हैं। मध्यावकाश का समय 30 मिनट होता है पर समाप्त एक घंटे में होता है। इस प्रकार शिक्षक  4से 5 व 3 से 4घंटे कार्य करता है। RTE के मुताबिक प्रतिदिन शिक्षक को साढ़े सात घंटे रुकना है। रुकता 3 से ५ घंटे है। अब आप पूरे वर्ष काम आंकड़ा खुद निकालो शिक्षक कितने दिन कार्य करता है। अरे भाई जरूरी नहीं कि जो व्यवस्था हमारे लिए समस्या लग रही हो वह देश के लिए हितकारी न हो। शिक्षक ही तो है जो समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत करता है। अगर गहराई से चिंतन करें तो विदेशी आक्रांता व कंम्पनियां शिक्षक से ही तो घबराती है। आज शिक्षक ने अपनी जिम्मेदारी वहन करना बंद कर दिया है। जिसका नतीजा देश फिर से गुलामी की ओर बढ़ रहा है। शासक का तो काम है लोगों को गुलाम बनाये रखना। वह चाहे देशी हो या विदेशी। पर शिक्षक का कार्य है शासक पर लगाम लगाये रखना। वह घर का हो या बाहरी। इसी लिए अमेरिका जैसे देश भारतीय शिक्षक से घबराता है। परन्तु क्या कहा जाए शिक्षक को, क्योंकि मैं भी शिक्षक हूं, चाटुकारिता की हद ही पार कर दी है। निजी शिक्षक जनता को जी भर के चूस रहे हैं सरकारी शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों से भाग जिसका रहे हैं। नतीजा है कि एक अदना सा तहसील का चपरासी, लिपिक हमें एक मात्र फोन से अपने कार्य को कराने के लिए बुला लेता है और न जाने पर कार्यवाही की धमकी देता है। एक  नेता  हम पर उंगलियां उठा रहा है। हम वह शिक्षक रहे हैं जो एक निरंकुश राजा को भी नियंत्रित करते थे ये तो लोकतंत्र वाले शासक इन्हें नियंत्रण में रखना  कौन बड़ी बात है। बस हम अपने दायित्वों का निर्वाहन करने लगे।
 हमने पूर्व भी लिखा था कि

जब शिक्षक चाटुकार हो जाये तो समाज भ्रष्ट हो जाता है। और जब राजा व्यापारी हो जाये तो देश नष्ट हो जाता है।

आज जो हम शिक्षकों​ पर उंगलियां उठा रहे​ है ये हमारे तलवे चाटते नजर आयेंगे। केवल हम अपनी जिम्मेदारियों का सही से निर्वाहन करने लगे। शिक्षक का कार्य केवल पढ़ाना ही नहीं बल्कि सही और गलत को समाज के सामने रखना भी है, समाज को सही मार्ग दिखाना भी है।

भाइयों व बहनों जिनको मेरी बातों से उनके आत्म सम्मान को ठेस लगी हो माफ करना।

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