Wednesday, 26 April 2017

Reason of India and Pakistan u dividation

अक्सर जब हम इतिहास की बात करते हैं तो हमसे उसके साक्ष्य मांगे जाते हैं। जो अपनी बात को सिद्ध करने के लिए जरूरी है। पर मैं जानना चाहता हूं कि जो लेख हमारे पास है वे कहां तक सत्य है? हम वर्तमान की घटनाओं पर गौर करें तो पाते हैं कि घटना का हमें जो कारण बताया जाता है वास्तव में उससे भिन्न होता है। जैसे ब्राह्मणों ने पूरे भारत की सत्ता पर, छल कपट धोखाधड़ी, भेदभाव, धार्मिक जातीय भावनाओं आदि के सहारे, काबिज रहे और है। पर मान्य इतिहास में कहीं भी इसका वर्णन नहीं मिलता। तो हम यह कैसे मान ले कि हमारे सामने हमारे इतिहास को परिलक्षित करने वाले जो लेख, साहित्य, मौजूद है वह पूर्णतया सही व गलत है? फिर इतिहास की अनेकों घटनाएं ऐसी है जिनका वास्तविक कारण कुछ और है बताया कुछ और जाता है। जैसा कि अनेक मामलों में आज भी होता है। जैसे बहू ने आत्महत्या किसी भी कारण से की हो पर आरोप दहेज प्रताड़ना का ही लगता है। जब ऐसी छोटी छोटी बातों की असलियत बदल जाती है तो उस समय जब अधिकांश जनता अनपढ़ थी तो वास्तविक तथ्य क्यों नहीं छिपाए गये होंगे?

आइये थोड़ा भारत पाक बंटवारा की ओर इशारा करते हैं- अक्सर यह कहा जाता है कि भारत पाक विभाजन जिन्ना गांधी की जिद व धार्मिक कारणों से हुआ। पर मैं इस से इन्कार नहीं करता हूं कि जो हमें बताया गया है वह पूर्णतया गलत है। पर मेरा मानना इस बंटवारे के पीछे कुछ और ही वजह है जिसे चालाक राजनीतिक लोग छिपाए बैठे हैं। आइये इस बंटवारे के पीछे कुछ सांस्कृतिक रिवाज, प्रेरणा स्थलों व लोगों की ऐतिहासिक चेतना के सन्दर्भ में देखते हैं। आज अगर हम भारत की परम्पराओं को गौर करें तो हमारी बहुत सी परम्पराएं  सैंधव सभ्यता से मिले प्रतीकों से मिलती जुलती है जिन्हें लोग विभिन्न अनुष्ठानों​, रीति-रिवाज परम्पराओं के रूप में रक्षित किये है पर उनका इतिहास में कहीं वर्णन नहीं है। हम सब यह अच्छी तरह से जानते हैं कि सैंधव सभ्यता के अधिकांश अवशेष वर्तमान पाकिस्तान में है। जहां अधिकांश मुस्लिम लोग हैं। वहीं इस सभ्यता से प्रेरणा लेने वाले लोगों भारत में है, जहां पर ये एतिहासिक प्रेरणा स्थल नहीं है। कहते हैं कि 1842 में मैसन ने सिंधु घाटी की सभ्यता की ओर इशारा किया। अर्थात सबसे प्राचीन इतिहास वैदिक इतिहास है के मिथक तो तोड़ा। लोगों का दिमाग अपनी ऐतिहासिक स्थलों​ की ओर न जाये इसलिए अंग्रेजों के विरुद्ध विभिन्न छोटे छोटे संघर्ष शुरू कराये गये जिनका अधिकांश नेतृत्व आदिवासियों ने किया। और इन भोले-भाले आदिवासियों ने मैसन को न सुना न जान पाये न ही इन्हें सिंधु घाटी की सभ्यता से कोई लेना-देना रहा।
जब 1922-23 में इस सैन्धव सभ्यता को खोजकर अंग्रेजों ने भारत के पटल रख दिया और वैदिक इतिहास की प्राचीनता को चुनौती देते हुए1928 में सिन्धु घाटी की सभ्यता को सर्वाधिक प्राचीन घोषित कराया। तो उसी समय ब्राम्हणों ने अपनी नस्ल की श्रेष्ठता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई जिसने भारतीय लोगों के बीच में हिन्दू धर्म नाम का नया धर्म लाकर खड़ा कर दिया ताकि लोगों का ध्यान सिंधु घाटी की गरिमामयी सभ्यता की ओर लोगों का ध्यान न जाते। उन लोगों ने बड़ी चालाकी से लोगों की मनोदशा हिंदू शब्द से जोड़ने के लिए सिंधु को हिन्दु कहकर सिंधु को गाली बना डाला गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि आज भारतीय अपनी मूल सभ्यता सिंधु घाटी की सभ्यता को भूल गए और अपनी प्रेरणा का स्रोत देवी देवताओं को मानने लगे। आज अधिकांश भारतीयों के प्रेरणा स्रोत सिंधु घाटी से प्राप्त अवशेष होने चाहिए परंतु जानकारी के आभाव में हिन्दू मंदिर व देवी देवता बने हैं जो मूलतः यूनानी धर्म के है। सैन्धव सभ्यता की जानकारी हमेशा के लिए भारतीयों के मन मस्तिष्क में न आने पाए  इसलिए भारत पाक विभाजन कर अधिकांश सैन्धव सभ्यता के स्थल पाकिस्तान को दें दिये गये । और वर्तमान में भारत में पाकिस्तान विरोधी माहौल बना कर खड़ा कर दिया गया ताकि यहां के लोग अपने मूल उदगम क्षेत्र सैन्धव सभ्यता के स्थलो का भ्रमण करने की हिम्मत न कर सके और हमेशा हमेशा के लिए उस सैन्धव संस्कृति को लोग भूल जाये जिसे उनके पूर्वजों ने बनाकर तैयार किया था। उनके दिमाग से इस बात को​ हमेशा के लिए हटा दिया जाए कि हमारे पूर्वज ही इस सभ्यता के जनक थे। भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान को भारत से अलग करने का षणयंत्र इसलिए रचा गया, ताकि भारत के लोग कालांतर सिंधु सभ्यता को भारत की सभ्यता  न मानकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान की मानते हुए अपने ही पूर्वजों की सांस्कृतिक विरासत से  घृणा करने लगे और पुुः इस बात को स्थापित किया जा सके कि वैदिक इतिहास ही सबसे पुराना इतिहास है। भारत के बंटवारे की तत्कालीन परिस्थितियां पैदा करना भारोपीयों की बहुत बड़ी मिलीभगत थी। जिसका परिणाम हमेशा हमेशा के लिए भारत की सभ्यता कहीं जाने वाली पाकिस्तानी विदेश अफगानिस्तान की बनकर रह
जायेगी।
मेरा लेख पूर्णतया वैचारिक व स्वसंस्कृति के महत्व को ध्यान में रखकर लिखा गया है। मेरी किसी को चुनौती देना या हर्ट करना नहीं है।
शैलेंद्र कुमार गौतम कानपुर नगर उ० प्र०
Mob 9455615564

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