*🌸🌸🌸भारतीय संस्थाओं में बैठे लोगों का षणयंत्र और वैश्विक संस्थाओं को भारत में स्थापित करने की मिली भगत और दलितों और पिछड़ो के विरूद्ध षणयंत्रों का पर्दाफाश 🕸🕸✡*
अगर विश्व संस्थाओं से दलितों और पिछड़ो के हितों सम्बन्धी बयान या रिपोर्ट आये तो उसे सिर्फ छलावा समझे। क्योंकि सवर्णों की चाल का वह बहुत ही गोपनीय और षणयंत्रकारी हिस्सा है।
आपने देखा होगा कि आजकल सवर्ण दलितों और पिछड़ो व महिलाओं पर कुछ अधिक अत्याचार कर रहे है। भारत न्यायिक व अन्य सुरक्षा से जुड़ी संस्थायें दलितों और पिछड़ो की नहीं ही सुन रही न ही संवैधानिक प्रावधान होने के बावजूद सही निर्णय व फैसला कर रही है। जिससे दलितों और पिछड़ों का विश्वास भारत की इन संस्थाओं से उठ रहा है।
वही पर वैश्विक संस्थायें दलितों और पिछड़ों के हक और अधिकार में बोल रही है। उनके शोषण पर रिपोर्ट जारी कर रही हैं।
सामान्य व्यक्ति को यह लगता होगा कि भारत की संस्थायें उनके खिलाफ और विश्व संस्थायें उनके पक्ष में है। सामान्य व्यक्ति का यह सोचना स्वाभाविक है। पर सच्चाई यह नहीं है।
सच्चाई इसके ठीक विपरीत है। भारतीय संस्थाओं में बैठे विश्व संस्थाओं के चमचे और चाटुकार, भारतीय संविधान के अधीन गठित संस्थाओं को नष्ट और वैश्विक संस्थाओं को भारत में स्थापित करने की रणनीति के तहत ऐसा किया जा रहा है। हमें इस षणयंत्र का पर्दाफाश करना होगा तथा अपनी संस्थाओं को बचाने का प्रयास करना होगा।
हलांकि सवर्ण बड़ी चतुराई से कार्य कर रहे है। इसका एक मात्र उपाय है, विश्व संस्थाओं की सुविधाओं का बहिष्कार तथा पश्चिमी देशों की वस्तुओं व संस्कृति का बहिष्कार । अगर हम यह कर ले गये तो ये विश्व संस्थाये जो भारत में पैर पसार रही है। इन्हें यहां से बोरिया बिस्तर बांधना होगा। तथा सवर्णों को सबक सिखाने के लिए हमें अपनी सुरक्षा, आजीविका और स्वास्थ्य की व्यवस्था खुद खड़ी करनी होगी अन्यथा आपका शोषण करने से कोई नहीं रोक पायेगा। आप खुद सोचो जब दलितों और पिछड़े़ गांव स्तरीय पंचायतों से न्याय नहीं पा सके तो क्षेत्र स्तरीय, जिला , प्रदेश व देश स्तरीय पंजायतों व न्यायालयों की स्थापना की गई लेकिन स्तर और खर्च तो बढ़ता गया परन्तु दलितों और पिछड़ो को न्याय नहीं मिला, तो फिर आप विश्व स्तरीय संस्थाओं से न्याय और अपना हित कैसे पा सकोगे? भाइयों यह समय बहुत ही सोच समझकर निर्णय करने व त्याग करने का समय है। अगर एक बार भी वैश्विक व्यवस्था ने भारत में कब्जा कर लिया तो अपनी सुरक्षा और न्याय की उम्मीद मत करना।
स्वामी संबोधि आनंद।