Tuesday, 28 July 2020

पक्ष विपक्ष में उलझाकर, विश्व व्यवस्थापक करते राज

विश्व के अधिकांश लोग प्रतिक्रिया व आलोचना, समर्थन और विरोध करके ही अपने को श्रेष्ठ और ज्ञानी समझते रहते है। जबकि इन्हें यह पता ही नही है कि क्रिया और प्रतिक्रिया , आस्तिक और नास्तिक, सकारात्मक और नकारात्मक, पक्ष और विपक्ष एक ही सिक्के के दो पहलू है। विश्व व्यवस्थापक आम लोगो को आस्तिक व नास्तिक, सकारात्मक व नकारात्मक, पक्ष व-विपक्ष मे उलझाकर वास्तविकता, स्वीकरात्मकता और निष्पक्षता से कोसो दूर कर उन पर क्रमश: अलग अलग कर अपना अपना शिकंजा कसते रहते है। लोग अपने गुण और स्वभाव और वातावरणीय विचारों के अनुसार इसी में उलक्षकर आपस में वाद-विवाद, समर्थन और विरोध करने में अपनी ऊर्जा व्यय करते रहते। जिसका परिणाम वे हमेशा दुखी और परेशान रहते है। 
स्वामी संबोधि आनंद।

Monday, 20 July 2020

बहुजनों का ज्ञान, सवर्णों का जूठन मात्र है।

बहुजनों की विद्वता देखिए। जिस साहित्य को सवर्णो ने लिखा, जिस विषयवस्तु को सवर्णों ने निर्धारित उसी को पढ़कर,  शब्दों का जो अर्थ सवर्णो ने निर्धारित कर दिया उसे उसी रूप में मानकर, सवर्णो ने जो विद्यालय स्थापित किये उन्हीं में पढ़कर, खुद को सबसे बड़ा विद्वान मानते हुए उन्हीं सवर्णों का विरोध और आलोचना करते हुए देखे जा सकते। 
       आज तक जो विषय वस्तु, साहित्य, शब्दों का अर्थ सवर्णों ने स्थापित कर दिये उन्हें बदलने और नवीन अर्थ निकालने और नवीन शब्द गढ़ने की कूबत नही दिखाई देती। जबकि शब्दों का अर्थ, साहित्य, विषयवस्तु सवर्णों ने अपने हित को ध्यान में रखते हुए स्थापित किये है। उन्ही को रट्टा मारकर खुद को ज्ञानी समझ रहे है। उन्ही सवर्णों को चुनौती देते फिर रहे है जिन्होने ये सारा जाल अपने हितों और आपको अंधेरे में रखने के लिए बुना है। कभी कभी आपके अपने व्यक्ति को आगे कर आपको फंसाये रखने के लिए दाना डालते है। आप उनसे नही फंसोगे तो उनके पुतले से तो फंसोगे। जब पुतले से भी नही फंसोगे तो उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं और सहूलियतों से तो फंसोगे। कहीं न कही ब्रम्हजाल में तो फंसोगे। उन्ही द्वारा दी गई फर्जी और झूठी जानकारी को रट्टा मारकर खुद को विद्वान और ज्ञानी कहते फिरने वाले ये बहुजन कितने महान विद्वान है! मैं इनकी विद्वता को सलाम करता हूं। 

स्वामी संबोधि आनंद।