इस अम्बेदकर जयन्ती की बधाईयों को लेकर मैं क्या करूं।
उस समय ये बधाइयां और चुभती है जब दुश्मन बाबा साहब अंबेडकर की बनाई व्यवस्था को नष्ट कर रहा हो और हमारे समाज के कर्णधार व्यवस्था के नष्ट होने पर चुप्पी साधे हो। और बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर गले में टांग गाने,बजाने व मौज मनाने में लिप्त हो। क्या नाचना,गाना, मौज मनाना ही अम्बेदकर का मिशन है।
आज बड़े जोर जोर से बहुजन माइक लगाकर चिल्ला रहे हैं "बाबा तेरा मिशन अधूरा, हम सब मिलकर करेंगे पूरा"।
बड़ा ही आश्चर्य होता है कि हम खुद यह मानते व कहते हैं कि बाबा साहब अंबेडकर का मिशन अधूरा है। हमारा दुश्मन कहता है तो क्या बुरा करता है।
अगर बाबा साहब का मिशन अधूरा होता तो पूरा भारत उनकी बनायी व्यवस्था में रहकर अपना विकास न कर रहा होता। बाबा साहब के मिशन को पूरा करने की नहीं बढ़ाने की जरूरत है। जोकि नाचने, गाने, खाने पीने मौज मनाने से नहीं चलने वाला। इसके लिए हमें वर्तमान परिस्थितियों, व्यवस्था को समझते हुए अवसर तलाशने से पूरा होगा।
उस समय ये बधाइयां और चुभती है जब दुश्मन बाबा साहब अंबेडकर की बनाई व्यवस्था को नष्ट कर रहा हो और हमारे समाज के कर्णधार व्यवस्था के नष्ट होने पर चुप्पी साधे हो। और बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर गले में टांग गाने,बजाने व मौज मनाने में लिप्त हो। क्या नाचना,गाना, मौज मनाना ही अम्बेदकर का मिशन है।
आज बड़े जोर जोर से बहुजन माइक लगाकर चिल्ला रहे हैं "बाबा तेरा मिशन अधूरा, हम सब मिलकर करेंगे पूरा"।
बड़ा ही आश्चर्य होता है कि हम खुद यह मानते व कहते हैं कि बाबा साहब अंबेडकर का मिशन अधूरा है। हमारा दुश्मन कहता है तो क्या बुरा करता है।
अगर बाबा साहब का मिशन अधूरा होता तो पूरा भारत उनकी बनायी व्यवस्था में रहकर अपना विकास न कर रहा होता। बाबा साहब के मिशन को पूरा करने की नहीं बढ़ाने की जरूरत है। जोकि नाचने, गाने, खाने पीने मौज मनाने से नहीं चलने वाला। इसके लिए हमें वर्तमान परिस्थितियों, व्यवस्था को समझते हुए अवसर तलाशने से पूरा होगा।
No comments:
Post a Comment