Monday, 20 August 2018

भारत का भविष्य किसके हाथ

भविष्य में भारत पर नियंत्रण सरकार का होगा या बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हाथों।
भारत के कुछ लोग राजनीतिक सत्ता को सभी तालों की चावी समझते है, वे अपनी मूर्खता और अज्ञानता पुनर्मूल्यांकन करें। विचार करें भारत की हर प्रकार की सत्ता शनै: शनै: किनके हाथों में हस्तानान्तरित हो रही है। जिस सत्ता ( सरकार में प्रतिनिधित्व) के लिये अपनी ऊर्जा रातोंदिन व्यय कर रहे है वह सरकार एक मात्र बिजूका की तरह होगी।
अभी भी वक्त है इस ओर भारत के लोग विचार करें। मै कुछ उदाहरण पेश कर रहा हूं।
1- जो भोजन कल किसान पैदा करते थे, उनके अपने बैल, बीज, मजदूर आदि होते थे। आज कृषि का बीज पूर्णतया विदेश कंपनियों माहिको, मोसेंटो जैसी कम्पनियों के नियंत्रण में आ गया।
2- स्वास्थ्य - कल भारत का हर व्यक्ति शुद्ध भोजन, शुद्ध हवा, शुद्ध पानी का प्रयोग करते थे। आज उसका फिल्टरेशन विदेशी कंम्पनियों के हाथों पहुंच गया।
3- सुरक्षा-  कल भारत की बस्तियों का निर्माण कुछ इस प्रकार था कि उनकी गलियों से एक समय पर एक ही व्यक्ति गुजर सकता था मोटरगाड़ी का जाना तो असम्भव ही था। परन्तु वर्तमान में बड़े बड़े क्रूज जैसे लड़ाकू विमानों का निर्माण निजी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों किया जा रहा है। उनकी डील प्राइवेट सेक्टर के माध्यम से किया जा रहा है। लड़ाकू विमान उतारने के लिये निजी कंपनियों द्वारा चौड़ी चौड़ी सड़के बनायी जा रही है, हां वही सड़के जिनमें आपकी मोटर गाड़ियां सरपट दौड़ रही है और आप बिना धक्का के अपनी गाड़ी को दौड़ता देख खुश होते है। उन्हीं सड़कों पर आपको नियंत्रित करने के एक लिये एक समय निजी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लड़ाकू विमान भी उतरते दिखेगे।

अब आपको तय करना है कि इसका उपाय क्या है। अपनी विलासी जिन्दगी या फिर विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।

भवतु मंगलम्
स्वामी स्वबोधि आनंद।

Sunday, 19 August 2018

विश्व में फैले धर्म वास्तव में धर्म नही व्यवस्था है

आइये कुछ फालतू की बात की जाये।
1- पूरे विश्व का विभाजन ईसाई, इस्लाम,यहूदी,पारसी में बंटा है। सभी का जन्म एक क्षेत्र विशेष है।
2- भारत  का विभाजन हिंदू( मूलतः यहूदी), इस्लाम, ईसाई, बौद्ध में विभाजित है।
3- हिंदू ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्ध (शूद्र) मे विभाजित है।

विश्व का विभाजन धार्मिक रूप से।
धर्म विभाजन वर्ण रूप में
वर्ण विभाजन वर्ग रूप में
वर्ग विभाजन जाति रूप में
जाति विभाजन उपजाति रूप में।

जरा सोचो ! जिन्हें हम धर्म मानते है, क्या वे वास्तव में धर्म है।

या

प्रकृति और प्राणी के मध्य स्थित अन्तर्सम्बम्ध को धर्म कहेगे। ???????