Friday, 31 March 2017

हिंदुत्व क्या है?


आज तक किसी न इतनी सटीक परिभाषा किसी ने नहीं दी होगी।




यहूदियों द्वारा भारतीय मूलनिवासियों को दास व बुद्धि​हीन बनाये रखने की सर्वोत्तम व्यवस्था है।


यह भावी डिजिटल मुद्रा की तरह है जिसका अस्तित्व तो कहीं नहीं है पर जो इसका उपयोग करेगा वह अपनी कमाई का कुछ न कुछ हिस्सा अवश्य देना पड़ता है। जिसका फायदा निजी क्षेत्र को होता है। जिस प्रकार निजीकरण में मूलनिवासी नौकर चाकर तो बन सकते है पर वे मालिक नहीं बन सकेंगे। ठीक उसी तरह  हिंदू धर्म को मानने वाले भक्त तो बन सकते है पर धर्माधिकारी नहीं बन सकते।

जिस प्रकार निजी क्षेत्र के लोग भारतीय संसाधनों का भारतीय नामों के माध्यम से बड़ी चालाकी से अंधाधुंध उपयोग अपने हितों के लिए कर रहे हैं। ठीक उसी तरह यहूदियों ने भारतीय​ बौद्ध धर्म, दर्शन, संस्कृति को भारतीय नामों के माध्यम से भिन्न भिन्न तरीकों से थोड़ा बहुत परिवर्तन कर अपने हितों में प्रयोग किया।
इसे संविधान की उद्देशिका से भी समझा जा सकता है।
संविधान की उद्देशिका में समाजवादी लोकतंत्र शब्द का प्रयोग किया गया है। पर जवाहरलाल नेहरू ने समाजवाद को छोड़कर पूंजीवाद व औद्योगिकीकरण​ की नीति अपनाई जिससे भारतीय मूलनिवासी नौकर चाकर बनकर रह गया है।
हमें देशी बनाम विदेशी की लड़ाई लड़नी चाहिए।
हमें सार्वजनिक बनाम निजीकरण की लड़ाई लड़नी चाहिए।
हमें कृषिकरण बनाम औद्योगिकीकरण​ की लड़ाई लड़नी चाहिए।
हमें युवा व रोजगार की लड़ाई लड़नी चाहिए।
हमें मशीन बनाम मानव विकास की लड़ाई लड़नी चाहिए।
हमें समाजवाद​ बनाम पूंजीवाद की लड़ाई लड़नी चाहिए।
हमें पर्यावरण बनाम प्रदूषण की लड़ाई लड़नी चाहिए।
हमें लोगों के स्वास्थ्य के लिए लड़ना चाहिए।
पृथ्वी के बढ़ रहे ताप के विरूद्ध आन्दोलन करना चाहिए।
हमें विदेशी व देशी कंपनियों द्वारा  भारतीय संसाधनों के अन्धाधुन्ध दुरूपयोग के विरूद्ध संघर्ष करना चाहिए।
हमें पार्टियों के निजी एजेण्डाओं के विरूद्ध व संवैधानिक एजेण्डा के पक्ष में लड़ना चाहिए।
हमें धर्म व जाति के विरूद्ध धर्मनिरपेक्षता की लड़ाई लड़नी चाहिए।

शूद्रों ​ने इस्लाम क्यों अपनाया

जब ब्राह्मणों ने बौद्ध धर्म को नष्ट कर हिन्दू धर्म को स्थापित कर अपना पाखण्ड, अन्धविस्वास, जातिवाद को बढाकर इस देश के मूलनिवासी पर अत्याचार,:जुल्म इस कदर बढाता कि विश्व इतिहास में कही इस प्रकार का कोई उदाहरण नही मिलता। ब्राह्मणों के इस अत्याचार से बचने के लिए मूलनिवासियों को सशक्त सहारे की जरूरत थी, ऐसी परिस्थितियों मे उन्हें सबसे बेचा सहारा इस्लाम धर्म ने दिया। जो लोग इस्लाम धर्म अपना लिये उनकी रक्षा इस्लाम ने बखूबी किया और आज भी अपने अनुयायियों की रक्षा कर रहे। जबकि हिन्दू धर्म में आज भी ब्राह्मण अपने ही अनुयायियों पर अत्याचार, भेदभाव करते है। जिस तेज गति से मूलनिवासी इस्लाम धर्म को अपनाया उसका परिणाम इस देश में इस्लाम तेजी सर बढा और मजबूत हुआ। कहने का तात्पर्य यह है कि इस देश का मुस्लिम वो मूलनिवासी है जो ब्राह्मणों के अत्याचार से बचने के लिये इस्लाम को अपनाया इस बात के प्रमाण आज भी मौजूद हैं जैसे ब्राह्मण जिस प्रकार शूद्रो से भेदभाव, नफरत, छुआछूत, उसी प्रकार मुस्लिमो से करते है। जब ब्राह्मणों ने खुद को इस्लाम को नष्ट करने मे अक्षम पाया तो वे भी इस्लाम धर्म अपना कर घुसपैठी बन गये तथा इस्लाम मे मौलवी,मुल्ला बनकर इस्लाम मे अनेको विकृतियां पैदा कर दी। जिसका परिणाम इतने घातक साबित हुये कि हिन्दू धर्म के ब्राह्मण. और इस्लाम के मुल्ला  मौलवी दोनो ने मिलकर खूब कत्लेआम,  कराया, तथा इस देश मे इस्लाम और मूलनिवासियो के  मध्य नफरत की मजबूत दीवार खड़ी करने मे सफल रहे।

Sunday, 19 March 2017

*Some Nice Collections*

*Quote 1 .* जब लोग आपको *Copy* करने लगें तो समझ लेना जिंदगी में *Success* हो रहे हों.

*Quoted 2 .* कमाओ…कमाते रहो और तब तक कमाओ, जब तक महंगी चीज सस्ती न लगने लगे.

*Quote 3 .* जिस व्यक्ति की इच्छा  खत्म, उसकी तरक्की भी खत्म.

*Quote 4 .* यदि *“Plan A”* काम नही कर रहा, तो कोई बात नही *25* और *Letters* बचे हैं उन पर *Try* करों.

*Quote 5 .* जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की.

*Quote 6 .* भीड़ हौंसला तो देती हैं लेकिन पहचान छिन लेती हैं.

*Quote 7 .* अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में लग जाती हैं.

*Quote 8 .* कोई भी महान व्यक्ति अवसरों की कमी के बारे में शिकायत नहीं करता.

*Quote 9 .* महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है.

*Quote 10 .* जिस चीज में आपका *Interest* हैं उसे करने का कोई टाईम फिक्स नही होता. चाहे रात के *1* ही क्यों न बजे हो.

*Quote 11 .* अगर आप चाहते हैं कि, कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये.

*Quote 12 .* सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते.

*Quote 13 .* जीतने वाले अलग चीजें नहीं करते, वो चीजों को अलग तरह से करते हैं.

*Quote 14 .* जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी.

*Quote 15 .* यदि लोग आपके लक्ष्य पर *हंस* नहीं रहे हैं तो समझो *आपका लक्ष्य बहुत छोटा हैं.*

*Quote 16 .* विफलता के बारे में चिंता मत करो, आपको बस एक बार ही सही होना हैं.

*Quote 17 .* सबकुछ कुछ नहीं से शुरू हुआ था.

*Quote 18 .* हुनर तो सब में होता हैं फर्क बस इतना होता हैं किसी का *छिप* जाता हैं तो किसी का *छप* जाता हैं.

*Quote 19 .* दूसरों को सुनाने के लिऐ अपनी आवाज ऊँची मत करिऐ, बल्कि अपना व्यक्तित्व इतना ऊँचा बनाऐं कि आपको सुनने की लोग मिन्नत करें.

*Quote 20 .* अच्छे काम करते रहिये चाहे लोग तारीफ करें या न करें आधी से ज्यादा दुनिया सोती रहती है ‘सूरज’ फिर भी उगता हैं.

*Quote 21 .* पहचान से मिला काम थोडे बहुत समय के लिए रहता हैं लेकिन काम से मिली पहचान उम्रभर रहती हैं.

*Quote 22 .* जिंदगी अगर अपने हिसाब से जीनी हैं तो कभी किसी के *फैन* मत बनो.

*Quote 23 .* जब गलती अपनी हो तो हमसे बडा कोई वकील नही जब गलती दूसरो की हो तो हमसे बडा कोई जज नही.

*Quote 24 .* आपका खुश रहना ही आपका बुरा चाहने वालो के लिए सबसे बडी सजा हैं.

*Quote 25 .* कोशिश करना न छोड़े, गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल सकती हैं.

*Quote 26 .* इंतजार करना बंद करो, क्योकिं सही समय कभी नही आता.

*Quote 27 .* जिस दिन आपके *Sign #Autograph* में बदल जाएंगे, उस दिन आप *बड़े आदमी बन जाओगें.*

*Quote 28 .* काम इतनी शांति से करो कि सफलता शोर मचा दे.

*Quote 29 .* तब तक पैसे कमाओ जब तक तुम्हारा बैंक बैलेंस तुम्हारे फोन नंबर की तरह न दिखने लगें.

*Quote 30 .* *अगर एक हारा हुआ इंसान हारने के बाद भी मुस्करा दे तो जीतने वाला भी जीत की खुशी खो देता हैं. ये हैं मुस्कान की ताकत.*

Tuesday, 14 March 2017

लोकतंत्र को नष्ट करने की साजिश

आज जिस तरह से शासक वर्ग निजीकरण, वैश्वीकरण, और उदारीकरण के नाम पर sc,st,obc,और minorities को धीरे धीरे शासन-प्रशासन में प्रदत्त प्रतिनिधित्व से वंचित कर रहे है, सामाजिक सुधार हेतु प्रदत्त कुछ विशेषाधिकारों को असमानता के नाम पर समाप्त कर रहे है। जिस प्रकार लोकतंत्र के चारो स्तम्भों ( व्यवस्थापिका, कार्यपालिका,न्यायपालिका व मीडिया) से लोगों का विश्वास उठने लगा है, वह भारतीय गणराज्य के लिये भयानक खतरा है। इतिहास गवाह है कि जब जब आम नागरिकों के अधिकारो का दमन किया गया, तब तब सत्ता परिवर्तन हुआ। आज भारतीय गणराज्य में भी ऐसा ही कुछ नजर आता है। लोग असहिष्णुता के शिकार हो रहे है, इसके बावजूद कुछ राजनीतिक दल व सामाजिक दल अपनी आदत से बाज नही आ रहे है। सुनने में उनके बयान भले ही अच्छे लग रहे हो  पर , इस भारतीय गणराज्य में, अप्रत्यक्ष रूप से लोकतंत्र को विघटित व राजतंत्र को स्थापित करने वाले है। कभी कभी लगता है कि यह बयान वास्तव में लोकतंत्र को नष्ट करने के लिये जानबूझकर दिये जा रहे, यह बयानबाजी इतनी खतरनाक है कि भारतीय गणराज्य को कालान्तर में कई टुकड़ों में बॉटने का कार्य करेगे। शैलेन्द्र कुमार कानपुर नगर 8896561604

Monday, 13 March 2017

बहुजन समाज व बहुजन समाज पार्टी की दुर्दशा की बजह *यिन और यांग* ऊर्जा का बिगड़ा हुआ सामंजस्य- एक रोचक अध्ययन
🌷🌷9*4*5🌷🌷🌷🌷🇮🇳
आपने अक्सर सुना होगा क़ि प्रत्येक व्यक्ति की सफलता मे एक महिला का योगदान जरूर होता है। बजह?????
क्योंकि महिलाओ मे यिन ऊर्जा होती है। जिसका प्रवाह बाहर से अंदर की ओर होता है। यह ऊर्जा वलयाकार होती है। जिसकी बजह से ही महिलाओ का शरीर लहरदार होता है।
यही बजह है क़ि महिलाएं extrovert ज्यादा होती हैं। इन्हें किसी की मदद करने या सेवा करने या पालन पोषण करने या किसी पर अपना सब कुछ निछावर करने की प्रवत्ति सर्वाधिक होती है। इसी बजह से माताए बहने imotional होती हैं।क्योंकि इन्हें ईश्वर ने design ही इस प्रकार किया हुआ है।
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जबकि पुरुषो मे यांग ऊर्जा होती है जो क़ि श्रजनात्मक प्रवत्ति की होती है। जो शरीर के अंदर से बाहर की तरह प्रवाहित होती है। यह ऊर्जा आयताकार या वर्गाकार होती है। इसीलिए पुरुषो के शरीर लहरदार न होकर आयात व वर्ग आकार के होते हैं।
इसी ऊर्जा के संतुलन मे कमी के कारण हमारे परिवारों मे झगड़े आपसी संबंध, स्वास्थ्य आदि खराब होते हैं।
इसकी बहुत अच्छी व प्रमाणिक गणित व भौतिक विज्ञान है आप परेशान न हो। इस ऊर्जा के वितरण व प्रकार का उदाहरण आपके हमारे कान हैं।
चूंकि महिलाओ को ईश्वर द्वारा मदद करने या पालन पोषण के लिए बनी है। इसी लिए महिलाओं मे वात्सल्य सबसे ज्यादा होता है जिसके सही उपयोग से व्यक्ति सफल होता है। तभी कहा जाता है क़ि प्रत्येक सफल व्यक्ति की सफलता के पीछे एक स्त्री जरूर होती है।
चूंकि *महिलाओं मे creativity की बजाय receptivity ज्यादा होती है। इसी ऊर्जा की बजह से वह अच्छी रणनीतिकार, भविष्यद्रष्टा व नेतृत्व कर्ता नहीं होती हैं।*
इन दोनो *ऊर्जा यिन और यांग के तालमेल मे गड़बड़ी से ही समाज मे हिजड़ा पैदा होते हैं। क्योंकि महिलाओं मे मिलने वाले xx और पुरुषो मे मिलने वाले xy गुणसूत्रों के वितरण को जो चीज नियंत्रित करती है वह कोई और नहीं बल्कि यिन और यांग ऊर्जा ही है।*
चूंकि यदि पुरुषार्थपूर्ण ऊर्जा समाज मे ज्यादा होगी तो लोग विद्रोह भी उतना ही ज्यादा व जल्दी करेगें क्योंकि वह ऊर्जा इन्शान को शांत बैठने ही नही देगी। कुछ न कुछ श्रजन करने को बाध्य जरूर करेगी।
यही *बजह है क़ि हिजड़े चाह कर भी ताली बजाने, नाचने गाने के अलावा कुछ नही कर सकते।*
इसीलिए की सत्तावर्ग की बनी बनाई व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह कोई न कर सके तभी संघियों की सुषमा स्वराज ने पोर्न वेबसाइट से प्रतिबंध हटा लिया है। ताकि लोगों मे यांग ऊर्जा न इकठ्ठी हो। बहुसंख्य लोग हिजड़ा बने रहें।
यही बजह है क़ि LGBT अर्थात हिजड़ो homosexual lezbiun gay आदि के मुद्दों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ताकि समाज मे यिन ऊर्जा की भरमार पैदा करके व्यवस्था मे जमे लोग दीर्घकाल तक अपना कब्जा जमाये रह सकें।
*चूंकि स्त्रियों / महिलाओं मे ईश्वर ने दया करुणा मैत्री कूटकूट कर भरी है, तो हम अपनी माताओ बहनों से श्रजन व संघर्ष की उम्मीद कर ही कैसे सकते हैं?*
यही बजह है क़ि जो माता बहनें दया व करुणा की अद्वितीय मिशाल हैं। वही एक महिला अर्थात बहन मायावती जी पूरे समाज को गुलाम बनवा रही हैं।

*जब यिन ऊर्जा विद्रोह कर ही नही सकती, जब यिन ऊर्जा श्रजन कर ही नही सकती तो वही यिन ऊर्जा हमे कुशल नेतृत्व कैसे प्रदान कर सकती हैं?*

यही बजह है क़ि अच्छे नेतृत्व कर्ता अक्सर ब्रह्चर्य पूर्ण पुरुष ही होते हैं। फिर चाहे वो मान्यवर कांशीराम जी हो या डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर या शिवाजी महाराज या फुले शाहेब य कबीर या नानक या भगवान बुद्ध आदि आदि आदि।
महिलाये अच्छी सहयोगी जरूर रही है। कुछ एक ने पराक्रम भी दिखाए हैं। लेकिन इन्शान मे नर ऊर्जा व मादा ऊर्जा के मौलिक योगदान व प्रभाव की बात ही दूसरी है।
*यह तो कमी यांग ऊर्जा वाले पुरुषो की है जो अपने पुरुषार्थ की बजह हिजड़ो वाली ऊर्जा यिन पर भरोषा किये हुए हैं।*
दोषी हमारी बहन जी नही बल्कि आज का उनका समर्थक पुरुष समाज है। जिसमे यिन ऊर्जा की विशालता देखी जा रही है।
ऐसे मे प्रत्येक माता बहन से निवेदन क़ि अपने बच्चों व पति पिता भाई आदि मे पुरुषार्थ जगाएं। उन्हें मजबूर करें सामाजिक कार्य के लिए।
 नही तो सब कुछ लूट जायेगा इस यिन ऊर्जा की बजह से।
उम्मीद है क़ि आपको कुछ बात समझ मे आई होगी।
यदि न आई हो तो आपका सशरीर स्वागत हैं।
Written by Dr Vinod Dohrey