Wednesday, 23 February 2022

महिला सशक्तीकरण और चालाक शिकारी

      दोस्तों मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं । एक जंगल में कुछ जंगली भैंसों का झुंड था। वे आपस में मिलकर एक साथ रहते थे । एक दूसरे के सुख-दुख में साथ देती थी । अगर कोई भैंस बीमार हो जाए तो सभी भैंसे मिलकर उसकी रक्षा करती थी। एक दिन जंगल का राजा शेर ने भैंसों के झुण्ड पर आक्रमण कर दिया। जैसे ही शेर ने भैंसों पर आक्रमण किया वैसे ही सभी भैंसे मिलकर शेर पर आक्रमण कर शेर को भगा दिया। शेर ने अनेकों प्रयास किया लेकिन भैंसों की एकता के कारण उनका बालबांका भी नहीं कर सका। एक दिन उसकी (शेर की) मुलाकात एक सियार से हो गई । उसने सियार को पकड़ लिया और कहा कि मैं तुम्हें खा जाऊंगा। सियार डर के मारे हाथ जोड़कर विनती करने लगा। सियार बड़ा ही चालाक था। उसने कहा कि अगर आप मुझे छोड़ दो तो मैं तुम्हें प्रतिदिन एक भैंस लाकर दूंगा। जिसे तुम खाकर अपना पेट भर सकते हो। शेर को उसकी बात समझ में आ गई उसने शेर को इस शर्त के साथ छोड़ दिया कि वह रोज उसे एक हैं भैंस लाकर देगा। 
         सियार भैंस के झुण्ड के पास गया और उसने एक झूठी कहानी गढ़ी कि शेर ने उसके बच्चों को पकड़ लिया है। वह उन्हें एक एक कर के मार डालेगा वह मुझे भी मारना चाहता है मैं किसी तरह उसके चंगुल से छूटकर आया हूं मुझे अपने झुण्ड में रख लो। भैंसों ने सियार की बात पर विश्वास कर लिया। सियार बड़े प्रेम से भैंसों के झुण्ड में रहने लगा। कुछ दिनो तक सियार भैंसों के झुण्ड में बना रहा और सभी भैंसों से हिल मिल गया। जब सियार को यह विश्वास हो गया कि भैंसों ने उस पर पूरा विश्वास कर लिया तो। उसने शेर को खबर की कि तुम अब भैंसों के झुण्ड पर हमला करो लेकिन ध्यान रहे कि भैंसों पर सिर्फ हमला कर किसी एक भैंस को घायल करना उसे मारना नहीं। तुम मेरी विनती पर उन्हें छोड़ देना। 
           शेर ने वैसा ही किया उसने भैंसों पर हमला किया तो सियार शेर के आगे हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और सियार की विनती पर शेर ने भैंसों को छोड़ दिया। अब भैंसों को सियार पर पूरा भरोसा हो गया। सभी भैंसे उसकी बात मानने लगी। झुण्ड में कुछ भैंसे ऐसी भी थी जो सियार की चालाकी को समझ रही थी। उन्होंने भैंसों को चेतावनी दी कि वे सियार से सावधान रहें, हमें उसकी नियत पर भरोसा नहीं है। लेकिन अन्य भैंसों को उन भैंसों की बात पर भरोसा नहीं किया। मामला इतना बढ़ गया की भैंसें दो गुटों पर बंट गई। इधर सियार ने दो गुटों को आपस में समझौता कराने का नाटक किया। लेकिन समझौता भी नहीं होने दिया। भैंसों के दोनों गुट आपस में लड़ने -झगड़ने लगे। इस लड़ाई में दोनों गुटों से भैंसे घायल हो जाती तो सियार उन भैंसों को इलाज कराने के बहाने गुट से बाहर ले जाता और शेर के हवाले कर देता। सियार भैंसों के गुट में आकर घड़ियाली आंसू बहाता और शेर के हमले की रोज नई कहानी गढ़ता। 
       इधर भैंसों के दोनों गुटों की दुश्मनी लगातार बढ़ती गई। सियार ने भैंसों के सामने एक प्रस्ताव रखा कि हम तुम्हें सशक्त बनाने के लिए युद्ध की नई-नई विधियां सिखाएंगे ताकि तुम्हारा कोई सामना न कर सके। इस तरह वह भैंसों को प्रशिक्षित करने के नाम पर एक एक कर भैंसों को गुट से अलग कर देता और शेर को उन पर हमले करने के लिए आमंत्रित कर देता। शेर सियार की इस भैंस सशक्तीकरण की योजना से बहुत प्रभावित हुआ और उसने सियार को नाना प्रकार के पुरस्कारों से पुरस्कृत किया। 
     ऐसा ही कुछ हाल महिलाओं बच्चों और पुरुषों की सुरक्षा, संरक्षा, लालन-पालन के आधार परिवार को महिलाओं की उन्नति, शिक्षा, आजादी व विकास में सबसे बड़े बाधक, शोषक और प्रताणना का पर्याय बताकर महिलाओं और पुरुषों को एक दूसरे के विरुद्ध करने की साज़िश रची जा रही है। वे भेदभाद के नाम पर महिलाओं को अपने ही परिवार के विरुद्ध बगावत करने के लिए उकसा रहे हैं। परिवार रूपी संरक्षा व सुरक्षा के घेरों को महिलाओं के शोषणकारी संस्था के रूप में प्रस्तुत कर महिलाओं को परिवार से अलग करने की नाना प्रकार की साजिशों को लगातार अंजाम दिया जा रहा है।ताकि चालाक शिकारी की तरह शिकार को सुरक्षा घेरे से अलग करके उसे आसानी से शिकार बनाया जा सके। महिलाओं, बच्चो और पुरुषों की सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार परिवार है।जिसे महिलाओं के शोषणकारी संस्था के रूप में प्रस्तुतीकरण कर महिलाओं को परिवार के विरुद्ध करने और परिवार तोड़ने की लगातार साजिश चल रही है। अगर यही हाल रहा तो एक दिन परिवार व समाज रूपी संस्थाएं इतिहास के पन्नों का हिस्सा बनकर रह जाएगी और महिलाओं का खुलेआम सुरक्षा और संरक्षा के नाम पर शोषण किया जाएगा। 
    स्वामी संबोधि आनंद।