Saturday, 15 April 2017

सिंधुत्व

सिन्धुत्व के बारे में कहा जाता है कि यूनानी सिंधु नदी को इण्डस कहते थे जिसके कारण  जम्बूद्वीप  को इण्डिया कहा जाने लगा। बाद में आर्यों ने, जो भारोपीय  व हिब्रू भाषियन समूह के आक्रांता थे, सिंधु को हिंदु कहकर पुकारते थे। क्योंकि वे ''स' का उच्चारण 'ह' करते थे । जिसके कारण सिन्धु को वे हिंदु कहकर पुकारते थे। ऐसा ब्राह्मण विद्वानों​ का मानना है।

जहां तक मेरा चिंतन मनन है ब्राह्मणों का यह तर्क बड़ा ही षणयंत्रकारी और साजिश से भरा लगता है। अगर ब्राह्मणों ( आर्यों) को ' स' का उच्चारण नहीं आता था तो वेदों पुराणों में जगह जगह 'स' का प्रयोग कैसे कर लिया? हालांकि इस प्रश्न से भी बचने के लिए उन्होंने उपाय खोज लिया कि हिंदु शब्द मध्यकालीन आक्रांताओं​ का दिया हुआ है। तो फिर आपने सिंधु को हिंदु क्यों मान लिया।
उनके इन सभी तर्कों के समक्ष यह. बात स्वयं सिद्ध होती है कि हिंदु एक विदेशी शब्द है। जिसे स्वीकृत करना देशद्रोह से कम नहीं​है।
अब आते हैं कि सिंधत्व पर हिंदुत्व का आवरण कैसे हैं?

अगर आप वर्तमान में हिंदुओं द्वारा अपनाई जा रही अनेकों विद्याएं जो मूलतः सैन्धव सभ्यता की है और वहां से प्राप्त अवशेषों में भी मिली है। जिन पर ब्राह्मणवाद​ का लेपन कर, सनातन धर्म, सनातन संस्कृति आदि के नाम से समाज को परोसा गया। और आप सूक्ष्म दृष्टि से अवलोकन करें तो आज भी बहुजनों के कार्यों का ब्राह्मणीकरण कर पेश किया जाता है। आप ने पढ़ा होगा कि बुद्ध, कबीर, रविदास,आदि अनेकों बहुजन महापुरुषों का ब्राह्मणीकरण कर डाला। सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त योगी की प्रतिमा को शिव से, स्वास्तिक, व सतिया का चिन्ह,जो कि ऊर्जा का प्रतीक,व सूर्य व पृथ्वी के घूर्णन का प्रतीक होता था, उसे शुभ लाभ का प्रतीक बना दिया। और उस पर पाखण्ड का लेपन कर सैन्धव विज्ञान को नष्ट करने में सफल रहे।

यह. बहुत बड़ा विषय है जिस पर चर्चा परिचर्चा करने के लिए आमने सामने होना आवश्यक है।

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