इस समय भारत के कई राज्यों में चुनावों का माहौल चल रहा है। ऐसे में निर्वाचन आयोग द्वारा जगह- जगह मतदाता जागरूकता रैली व शपथ समारोह का आयोजन कराया जा रहा है। जोकि बेशक महत्वपूर्ण कार्य है। इस कार्यक्रम से नि:संदेह लोगों को बताया जा रहा है कि मताधिकार का प्रयोग करना, सरकार बनाने के लिए, कितना जरूरी है।
परन्तु इस सब के बीच सवाल खड़ा होता है कि मताधिकारी ( मतदाता) जागरूकता रैली आयोजन की आवश्यकता क्यों पड़ी?
१- क्या भारतीय नागरिकों को वोट के अधिकार की जानकारी नहीं है?
२- क्या भारतीय नागरिकों के पास वोट करने के लिए समय नहीं है?
३- क्या भारतीय नागरिक सरकार चुनने की इच्छा नहीं रखते?
४- क्या भारतीय नागरिक वोटिंग के प्रति उदासीन हो रहे हैं?
५- क्या भारतीय नागरिक अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं?
६- क्या भारतीय नागरिक वोटिंग करने से डर रहे ?
७-क्या मताधिकारी अशिक्षित हैं?
उपरोक्त ऐसे अनेकों प्रश्न जहन में उठते हैं। जिनका समाधान व जवाब सायद किसी के पास हो? परन्तु जहां तक मैं अनुभव व विचार कर पा रहा हूं, जिसके क्रम में लोगों को मतदान हेतु पूरी तरह से उदासीनता है जिसका सबसे बड़ा कारण योग्य, चरित्रवान, जिम्मेदार, देशप्रेमी, उत्तरदायी, ईमानदार, संविधान व देश, समाज व लोगों के प्रति निष्ठावान, नैतिक मूल्यों वाले जनप्रतिनिधियों का आभाव है। जो वोटर्स को उदासीन बनाता है। आज कोई ऐसा प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं नजर आता जो देश के लिए चुनाव में उतरा हो। सभी के सभी प्रत्याशी अपने कल्याण के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च करते हैं और फिर जनता को दोनों हाथों लूटते हैं। आज राजनीति को सेवा नहीं व्यापार बना दिया गया है। ऐसी स्थिति में वोटर को ही लूटा जाता है। आज के नेताओं व अंग्रेजों में कोई अन्तर समझ नहीं आता। तो जनता क्यों न उदासीन हो। जनता की
यही उदासीनता लोकतंत्र के लिए घातक होगा। निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता जागरूकता रैली के आयोजन से साफ साफ नजर आता है कि लोकतंत्र अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। बड़ें ही धीमें कदमों से राजतंत्र आता नजर आ रहा है।
Shailendra Kumar 9455615564
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