Monday, 20 February 2017

प्राचीन भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था थी कि कोई लड़की अपने हेतु सुयोग्य वर की तलाश स्वयं करती थी। ऐसे उदाहरण एक भी नही नजर आते कि लड़का वधू की तलाश करता हो। कहने का मतलब यह है कि बालिकाओं को अपना जीवन साथी चुनने उसके साथ जीवन यापन करने की स्वतंत्रता थी। पर जब से भारत की संस्कृति में विदेशी आर्यों ने दखल देना शुरू किया तब से महिलाओ, शूद्रो, की स्थिति दयनीय होती चली गयी। आर्यो के ऐसे अनेको उदाहरण भरे पड़े है कि किस तरह महिलाओं का उत्पीड़न कर उनके सारे अधिकार अपने हाथों में ले लिये। हम बहुत ही सूक्ष्म दृष्टि से भारत की वैवाहिक प्रथा पर अध्ययन करे तो कुछ अपवादो को छोड़कर आज भी लड़की पक्ष ही वर की तलाश करता है।जब वर पसन्द होता है उसके बाद ही वधू को देखने की अनुमति होती है। बीच में विदेशी आक्रमणकारी व आर्य संस्कृति के चलते महिलाओं का शोषण हुआ। पर बाबा साहब के संविधान लागू होने के बाद महिलाओं की स्थिति में कुछ सुधार नजर आ रहा है। महिलाओं ने भी अपनी गरिमा को समझना प्रारम्भ किया है। जिसका नतीजा पारिवारिक जीवन में आशातीत परिवर्तन आये है, जिन्हें पुरुषवादी आर्य संस्कृति के समर्थक हजम नही कर पा रहे है।और दिन प्रतिदिन महिलाओं व शूद्रो के अधिकारो में प्रहार कर रहे है। मेरा मानना है कि अगर महिलाओं व शूद्रों को अपने अधिकार सुरक्षित रखने है तो भारत सरकार पर संविधान के अनुरूप राजव्यवस्था चलाये व हिन्दू कोड बिल लागू करने का दबाव बनाना होगा। शैलेन्द्र कुमार, सरसौल, कानपुर नगर।8896561604

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