Monday, 27 February 2017

अपनी सफलता और असफलता के लिए आप ही उत्तरदायी है

हम अक्सर अपनी असफलताओं का दोष दूसरे को देते रहते हैं। जबकि अगर किसी दौड़ में कोई तेज दौड़ कर या आपको टंगड़ी मार कर गिरा जाये तो यह गलती उसकी नहीं बल्कि आपकी है। आप ने खुद में इतनी क्षमता पैदा नहीं की कि तेज दौड़ सके, या आप यह भूल गये कि जो तेज दौड़ नहीं पाते मगर धूर्त व चालाक होते हैं वे आपको टंगड़ी लगा कर जरूर गिरायेगे। आपकी इसी भूल का फायदा उठाकर उसने अपने स्वभाव के अनुसार टंगड़ी मार कर आपको गिराकर आगे बढ़ गया क्योंकि आप उससे सतर्क नहीं रहे बल्कि उस धूर्त स्वभाव वाले व्यक्ति को अपने पास आने दिया या आप खुद उसके पास गये।

     एक बात और जब आपके पास कोई आता है तो, आपके पास आने का,उसका क्या उद्देश्य है इसकी जानकारी आपको नहीं होती जबकि वह कोई भी व्यक्ति आपके पास निरुद्देश्य नहीं आता।
       जबकि आप किसी के पास जाते हैं तो किसी न किसी उद्देश्य से ही जाते हैं। जिसकी जानकारी उस व्यक्ति को नहीं होती। फिर भी वह आपसे सतर्क रहता है पर आप हजार धोखे खाने के बावजूद सतर्क नहीं रहते। जिसका नतीजा आपका पतन ही होता है।

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