Friday, 27 January 2017

TLM का प्रयोग एक साजिश। It is a mind fixation program

      "कल्पना ही पूरे विश्व मेंं राज करती हैं।"
नेपोलियन बोनापार्ट का यह कथन को ध्यान में रखते हुए विश्व नियंताओं द्वारा शिक्षण में TLM के प्रयोग को बढ़ावा दिया, जिससे लोगों की कल्पना शक्ति नष्ट किया जा सके।
  शिक्षक लोग शिक्षण कार्य करते समय शिक्षण अधिगम सामग्री का प्रयोग करते हैं। पर कभी इस बात पर विचार नहीं करते कि TLM के प्रयोग से बच्चे पर क्या असर पड़ता है।

आइये TLM  के प्रयोग पर विचार करे। नि: संदेह TLM के प्रयोग से बच्चे को किसी भी बिंदु को सीखने, जानने, एवं समझने में बेहद आसानी होती है। शिक्षक को भी सिखाने में सुगमता रहती हैं। पर कभी आपने यह सोचा है कि यह TLM का प्रयोग एक बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा है। बच्चे को  विचार शून्यता व कल्पनाहीनता की ओर ले जाने का सशक्त माध्यम है। जब हम बच्चे को परियों की कहानियों के माध्यम से शिक्षा देते थे या किसी वस्तु आदि के बारे में बताते थे तो क्या बच्चा अपने मस्तिष्क में भांति भांति की कल्पनाओं का अदृश्य चित्रण नहीं होता था? दोआज हम जब किसी वस्तु के बारे में बताते हैं और बच्चे के समक्ष तुरंत उस वस्तु का प्रतिरूप प्रस्तुत कर देते हैं तो क्या बच्चे के मस्तिष्क में भांति भांति की कल्पनाएं उस वस्तु के प्रति उभरती है वे प्रतिरुप देखते ही समाप्त नहीं हो जाती? हमने शिक्षण कार्य करते समय बच्चे को चिंतन, कल्पना,व मानसिक गतिविधियों से हटाकर उसकी सोचने, समझने, चिंतन व कल्पना को अवरूद्ध कर देते हैं । जोकि एक बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा समझ में आता है। यह एक प्रकार का mind fixation का program है। जो कि बहुत ही सोच समझ कर विश्व शासकों द्वारा तैयार कराया गया लगता है। बच्चे की शिक्षा ठीक उसी तरह कर दी गयी जैसे किसी फसल में उर्वरक डाल डाल कर उपज तो बढ़ायी जाती है पर उपज की स्वपोषण की क्षमता नष्ट कर दी जाती है। TLM के प्रयोग से बच्चे के ज्ञान में वृद्धि कर दी गई पर नवीन ज्ञान संरचना की क्षमता नष्ट कर दी गयी। जिसका परिणाम यह होता है कि बच्चे की कल्पनाशक्ति व तर्कशक्ति नष्ट होती जा रही है।

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