Sunday, 8 January 2017

निजीकरण व डिजिटलीकरण दोनों ही लोकतंत्र को नष्ट कर राजतंत्र स्थापित करने का सशक्त माध्यम है।

भारतीय अपने विभिन्न आंदोलनों को भूतकाल व जातिवाद पर केंद्रित करके रह गये है। अगर आजादी के बाद के भारत के इतिहास का सूक्ष्म अध्ययन करे तो साफ साफ झलकता है कि भारत की आजादी व लोकतंत्र की कोंपल भी नहीं फूटी कांग्रेस ने औद्योगिकीकरण की नीति अपना कर राजतंत्र की स्थापना के लिए नींव की ईंट रख दी थी।
    दूसरा भारत में मीसा लगाकर लोगों में भय पैदा किया गया और इसी भय की आड़ में भारतीय संविधान में मनमानी संबोधन किये गये।
        तीसरा सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार बढ़ा कर तथा सरकारी सेवाओं में हीलाहवाली पैदा कर निजी क्षेत्र की स्थापना व निजी क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं दे कर राजतंत्र स्थापित करने की ओर कदम बढ़ा दिया गया है।
चौथा कदम विकास के नाम पर उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण की नीति व अनेक विदेशी व्यापारिक समझौतों द्वारा लोकतंत्र की रीढ़ पर वार किये जा रहे है।
पांचवां भारत के लोगों का आधार नामांकन व डिजिटलीकरण कर लोगों की निजता पर डाका डालकर व उनकी निजी जिंदगी में हस्तक्षेप करने की नीति अपना कर भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मूलाधिकारों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। जोकि लोकतंत्र को समाप्त कर राजतंत्र व नये रूप की तानाशाही स्थापित करने की ओर कदम है।
हमारे प्यारे भारतीय अभी भी मुफ्त की योजनाओं, सुविधाओं में फंसकर खुद के स्वाभिमान को नष्ट करा रहे है तथा अशिक्षित लोगों की बात छोड़ो शिक्षित लोग भी नहीं समझ पा रहे है।

     आइये एक उदाहरण से अपनी बात समझाता हूं।


हमारे सभी साथियों को यह तो ज्ञान होगा कि सन् 1990  से पहले अधिकांश लोग अपने बच्चों को किसी सरकारी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए परेशान रहते थे, और वर्तमान में क्या स्थिति है किसी से छिपी नहीं है। क्या इस स्थिति के लिए आम जनता दोषी है? आज सरकारी विद्यालयों की यह स्थिति यूं ही नहीं हुई। सरकारी विद्यालयों की यह स्थिति बाकायदा योजनाबद्ध तरीके से की गई। आज सरकारी शिक्षक चाहे भी तो सरकारी नीतियों के चलते अपने मूल दायित्वों काम निर्वहन नहीं कर सकता। अब आप ही विचार करे कि यदि किसी सरकारी विद्यालय में पांच कक्षाएं है उसमें पचास बच्चें हैं। सरकारी नीति के अनुसार उस विद्यालय में दो ही शिक्षक नियुक्त किए जा सकते। अब आप ही सोचिए कि शिक्षक चाहकर भी सभी बच्चों को समुचित तरीके से अपनी सेवाएं नहीं दे सकता, क्योंकि तत्समय पर एक शिक्षक एक ही कक्षा में उपस्थित हो सकता है। शेष तीन कक्षाएं तो रिक्त ही रहेगी और उन कक्षाओं को भी डिस्टर्ब करती रहेगी जिनमें शिक्षक पढ़ा रहा होगा। यह तो मात्र नमूना है।  यह सब यूं ही नहीं है यह सरकार के hidden agenda के कारण है ताकि सरकारी विद्यालय नष्ट हो सके और निजी विद्यालय पल्लवित हो सके। जिससे सरकार में बैठे लोगों को राजतंत्र स्थापित करने में आसानी हो जाये।
शैलेंद्र कुमार 9455615564

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