Friday, 13 January 2017

भाजपा का माटी व किसान प्रेम दिखावा या सच्चाई

भाजपा किसानों को जाल में फंसाने की साजिश कर रही है।अभी हाल ही के निर्णय में भाजपा ने उत्तर प्रदेश के चुनावों को मद्देनजर रखते हुए निर्णय लिया है कि वह किसान व माटी  की समस्या को लेकर चुनाव में उतरेगी।
      भाजपा का मुद्दा बेहद लोकप्रिय व भावात्मक है। न लेकिन भाजपा के इस माटी व किसान समस्या को लेकर मुझे कुछ शंकाएं है।
१- बनिए व व्यापार की बात करने वाले भाजपाईयों को अचानक किसान व माटी की याद कैसे आ गई? अगर इन्हें वास्तव में किसान व माटी से प्रेम है तो अभी तक किसानों द्वारा की गई आत्महत्याओं को लेकर इन्होने क्या किया? जबकि ढाई साल से इनकी सरकार केंद्र में है?
२- अगर भाजपा को किसान व देश की माटी से प्रेम है तो उनकी केंद्र की सरकार ने जबरन भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर इतना अधिक हो हल्ला क्यों मचाया, और जब बिल पास कराने में नाकाम रहे तो दोबारा अध्यादेश लाकर किसानों की जमीन को औने-पौने दाम में पूंजीपतियों व विदेशी कंपनियों को क्यों दिया? अगर दिया है तो क्या उस कम्पनी में किसान की हिस्सेदारी तय की?
३- जिस प्रकार पूंजीपतियों को अपने उत्पादों का मूल्य निर्धारण करने का अधिकार  है क्या किसानों को अपनी उपज का मूल्य निर्धारण करने व बेचने का कानून बनाने का दम भाजपा या कोई सरकार चाहे सकती है?
४- जहां कहीं भी सरकार किसान की जमीन अधिग्रहण कर उद्योग स्थापित करें , उस जमीन पर स्थापित उद्योग के लाभ में किसान की हिस्सेदारी सुनिश्चित क्यों नहीं कर रही है?

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