हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग दोनों मिलकर तो असली खेल सैकड़ो साल से खेलते आये है। किसको.किसका.समर्थक बनाना है यह.हिंदू मुस्लिम धर्माचार्य व नीतिकार मिल बैठकर तय करते हैं। जो आम हिंदू मुस्लिम है, जो.मूलतः भारत का मूलनिवासी है, वह इन.नीतिकारों व धर्माचार्यों की रणनीतियों को नहीं समझ पाता। देश आजाद होते समय सबसे बड़ी कूटनीति यही रही होगी कि यदि देश आजाद हो गया तो भारतीय मूलनिवासियों को धर्म, देश आदि के नाम पर कैसे उलझाया जायेगा। इसलिए हिंदूमहासभा व मुस्लिम लीग दोनों ने मिल बैठ कर अखण्ड भारत को खण्ड खण्ड करने की रणनीति बनाई होगी। वास्तविकता को अगर बहुत ही सूक्ष्म और नीतिगत तरीक़े से समझा जाये तो भारत पाकिस्तान का बंटवारा, उनसे आपसी तनाव सब योजनागत् लगते है। अगर हिन्दू, मुस्लिम को वास्तव में एक दूसरे से नफरत होती तो विश्व के सभी मुस्लिम देशों से रिश्ते खराब होते। अगर हिंदुओं को इसाईयों से वास्तव में नफरत होती तो केवल भारत में रहने वाले इसाईयों से ही क्यों ? विश्व के अन्य देशों के इसाईयों से क्यों नहीं? वास्तव में भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, और भारत के अधिकांश.हिन्दू, मुसलमान सिंधु सभ्यता के मूल निवासियों के वंशज ही है, जिन्हें पश्चिमी विदेशी योजनाकार बड़ी चालाकी से बांटकर आपस में लड़ाते रहे हैं। धर्म और संस्कृति को इस बंटवारे का आधार बनाया। अधिकांश लोग इस बंटवारे को धर्म मानकर उसकी रक्षा के लिये आपस में लड़ते रहे और चालक विदेशी इस देश की प्राकृतिक संपदा को लूटते रहे है।
इन सब नीतियों को देखते हुए मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि।
1- भारत एक प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का देश हैं। यहां की जनता को जाति धर्म मे उलझाए रखो और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करते रहो।
2- भारत का बंटवारा एक बड़ी सोची समझी रणनीति के तहत किया गया और इससे विवाद बनाने इसलिए रखा जाता हैं ताकि भारत की उद्गमस्थल सिंधु सभ्यता, जोकि भारतीय मूलनिवासियों की प्रेरणा स्रोत हैं, को भारतीयों से दूर रखा जाये ताकि भारत के मूलनिवासी उस सभ्यता के अवशेष देखकर गौरवान्वित न होने पाये। षणयंत्रकारियो को उसी समय यह डर सताने लगा था, जब भारत की आजादी की लड़ाई भारत के शहीद लड़ रहे थे, कि अगर आजादी के बाद इस देश के लोगों को सिंधु सभ्यता के गौरवमयी इतिहास की जानकारी हो गई तो हमें उखाड़ फेंकने मे देर नही करेगें। इसलिए इसका एक ही उपाय सूझा भारत-अफगानिस्तान बाद में भारत- पाकिस्तान बंटवारा किया जाये और इन देशो में आपसी विवाद बनाये रखने की नीति का पालन भारत पाक दोनो देशों ने किया और कर रहे है। लेकिन दोनों देशों की जनता अपने लाडलों को देश की रक्षा के नाम पर कुर्बान करती रहती है। मै यह नहीं कहता कि लोगो को अपनी देश की सरहदों की सुरक्षा नहीं करनी चाहिये, सुरक्षा अवश्य करनी चाहिये लेकिन जब एक ही देश का बंटवारा एक सुनियोजित तरीके से किया गया हो तो उन्हे आपस में लड़ना नही एक होने की पहल करनी चाहिये।यही दशा समाज में लागू है।
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