हजारों सालों से भारत की सत्ता में कायम वर्ग का असली मकसद भारत का विकास नहीं रहा, बल्कि. भारत भूमि के गर्भ में छिपे अमूल्य धरोहर को निकाल कर अपने नस्लीय भाइयों तक पहुंचाना रहा है। जोकि आज भी जारी है। इसी संपदा के दोहन को रोकने के लिए आदिवासियों ने आंदोलन चलाया तो उन्हें नक्सली करार देते हुये मारा जा रहा है।
वैश्विकरण की नीति के सहारे विश्व संस्थाओं को मजबूत करने और भारतीय संस्थाओ को नष्ट करने का कार्य, षणयंत्र विकास के नाम पर, बहुत तेजी से किया जा रहा है। भारतीय संविधान द्वारा भारतीय जनता को प्रदान किए गए संरक्षण को माननीय सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से नष्ट कराया जा रहा है। जो बहुत ही चिंता का विषय है। आज जब भारतीय व्यवस्था भारतीयों के हाथों में है तब कोई गरीब, मजदूर किसान व समाज के हासिये पर.खड़े व्यक्ति को कोई संरक्षण नहीं मिल रहा है। जरा सोचिए कि वैश्विकरण की स्थिति में क्या हाल होगा?
अगर आज वैश्विकरण को.नहीं रोका गया तो आने वाली पीढियों की दशा साम्राज्यवाद से भी भयावह होगी। इसका एक ही.मात्र उपाय है सीमित आवश्यकताओं मे जीवन जीना और पश्चिमी देशों की वस्तुओं का बहिष्कार।
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