आज जिस तरह से शासक वर्ग निजीकरण, वैश्वीकरण, और उदारीकरण के नाम पर sc,st,obc,और minorities को धीरे धीरे शासन-प्रशासन में प्रदत्त प्रतिनिधित्व से वंचित कर रहे है, सामाजिक सुधार हेतु प्रदत्त कुछ विशेषाधिकारों को असमानता के नाम पर समाप्त कर रहे है। जिस प्रकार लोकतंत्र के चारो स्तम्भों ( व्यवस्थापिका, कार्यपालिका,न्यायपालिका व मीडिया) से लोगों का विश्वास उठने लगा है, वह भारतीय गणराज्य के लिये भयानक खतरा है। इतिहास गवाह है कि जब जब आम नागरिकों के अधिकारो का दमन किया गया, तब तब सत्ता परिवर्तन हुआ। आज भारतीय गणराज्य में भी ऐसा ही कुछ नजर आता है। लोग असहिष्णुता के शिकार हो रहे है, इसके बावजूद कुछ राजनीतिक दल व सामाजिक दल अपनी आदत से बाज नही आ रहे है। सुनने में उनके बयान भले ही अच्छे लग रहे हो पर , इस भारतीय गणराज्य में, अप्रत्यक्ष रूप से लोकतंत्र को विघटित व राजतंत्र को स्थापित करने वाले है। कभी कभी लगता है कि यह बयान वास्तव में लोकतंत्र को नष्ट करने के लिये जानबूझकर दिये जा रहे, यह बयानबाजी इतनी खतरनाक है कि भारतीय गणराज्य को कालान्तर में कई टुकड़ों में बॉटने का कार्य करेगे। शैलेन्द्र कुमार कानपुर नगर 8896561604
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