बहुजन समाज व बहुजन समाज पार्टी की दुर्दशा की बजह *यिन और यांग* ऊर्जा का बिगड़ा हुआ सामंजस्य- एक रोचक अध्ययन
🌷🌷9*4*5🌷🌷🌷🌷🇮🇳
आपने अक्सर सुना होगा क़ि प्रत्येक व्यक्ति की सफलता मे एक महिला का योगदान जरूर होता है। बजह?????
क्योंकि महिलाओ मे यिन ऊर्जा होती है। जिसका प्रवाह बाहर से अंदर की ओर होता है। यह ऊर्जा वलयाकार होती है। जिसकी बजह से ही महिलाओ का शरीर लहरदार होता है।
यही बजह है क़ि महिलाएं extrovert ज्यादा होती हैं। इन्हें किसी की मदद करने या सेवा करने या पालन पोषण करने या किसी पर अपना सब कुछ निछावर करने की प्रवत्ति सर्वाधिक होती है। इसी बजह से माताए बहने imotional होती हैं।क्योंकि इन्हें ईश्वर ने design ही इस प्रकार किया हुआ है।
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जबकि पुरुषो मे यांग ऊर्जा होती है जो क़ि श्रजनात्मक प्रवत्ति की होती है। जो शरीर के अंदर से बाहर की तरह प्रवाहित होती है। यह ऊर्जा आयताकार या वर्गाकार होती है। इसीलिए पुरुषो के शरीर लहरदार न होकर आयात व वर्ग आकार के होते हैं।
इसी ऊर्जा के संतुलन मे कमी के कारण हमारे परिवारों मे झगड़े आपसी संबंध, स्वास्थ्य आदि खराब होते हैं।
इसकी बहुत अच्छी व प्रमाणिक गणित व भौतिक विज्ञान है आप परेशान न हो। इस ऊर्जा के वितरण व प्रकार का उदाहरण आपके हमारे कान हैं।
चूंकि महिलाओ को ईश्वर द्वारा मदद करने या पालन पोषण के लिए बनी है। इसी लिए महिलाओं मे वात्सल्य सबसे ज्यादा होता है जिसके सही उपयोग से व्यक्ति सफल होता है। तभी कहा जाता है क़ि प्रत्येक सफल व्यक्ति की सफलता के पीछे एक स्त्री जरूर होती है।
चूंकि *महिलाओं मे creativity की बजाय receptivity ज्यादा होती है। इसी ऊर्जा की बजह से वह अच्छी रणनीतिकार, भविष्यद्रष्टा व नेतृत्व कर्ता नहीं होती हैं।*
इन दोनो *ऊर्जा यिन और यांग के तालमेल मे गड़बड़ी से ही समाज मे हिजड़ा पैदा होते हैं। क्योंकि महिलाओं मे मिलने वाले xx और पुरुषो मे मिलने वाले xy गुणसूत्रों के वितरण को जो चीज नियंत्रित करती है वह कोई और नहीं बल्कि यिन और यांग ऊर्जा ही है।*
चूंकि यदि पुरुषार्थपूर्ण ऊर्जा समाज मे ज्यादा होगी तो लोग विद्रोह भी उतना ही ज्यादा व जल्दी करेगें क्योंकि वह ऊर्जा इन्शान को शांत बैठने ही नही देगी। कुछ न कुछ श्रजन करने को बाध्य जरूर करेगी।
यही *बजह है क़ि हिजड़े चाह कर भी ताली बजाने, नाचने गाने के अलावा कुछ नही कर सकते।*
इसीलिए की सत्तावर्ग की बनी बनाई व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह कोई न कर सके तभी संघियों की सुषमा स्वराज ने पोर्न वेबसाइट से प्रतिबंध हटा लिया है। ताकि लोगों मे यांग ऊर्जा न इकठ्ठी हो। बहुसंख्य लोग हिजड़ा बने रहें।
यही बजह है क़ि LGBT अर्थात हिजड़ो homosexual lezbiun gay आदि के मुद्दों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ताकि समाज मे यिन ऊर्जा की भरमार पैदा करके व्यवस्था मे जमे लोग दीर्घकाल तक अपना कब्जा जमाये रह सकें।
*चूंकि स्त्रियों / महिलाओं मे ईश्वर ने दया करुणा मैत्री कूटकूट कर भरी है, तो हम अपनी माताओ बहनों से श्रजन व संघर्ष की उम्मीद कर ही कैसे सकते हैं?*
यही बजह है क़ि जो माता बहनें दया व करुणा की अद्वितीय मिशाल हैं। वही एक महिला अर्थात बहन मायावती जी पूरे समाज को गुलाम बनवा रही हैं।
*जब यिन ऊर्जा विद्रोह कर ही नही सकती, जब यिन ऊर्जा श्रजन कर ही नही सकती तो वही यिन ऊर्जा हमे कुशल नेतृत्व कैसे प्रदान कर सकती हैं?*
यही बजह है क़ि अच्छे नेतृत्व कर्ता अक्सर ब्रह्चर्य पूर्ण पुरुष ही होते हैं। फिर चाहे वो मान्यवर कांशीराम जी हो या डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर या शिवाजी महाराज या फुले शाहेब य कबीर या नानक या भगवान बुद्ध आदि आदि आदि।
महिलाये अच्छी सहयोगी जरूर रही है। कुछ एक ने पराक्रम भी दिखाए हैं। लेकिन इन्शान मे नर ऊर्जा व मादा ऊर्जा के मौलिक योगदान व प्रभाव की बात ही दूसरी है।
*यह तो कमी यांग ऊर्जा वाले पुरुषो की है जो अपने पुरुषार्थ की बजह हिजड़ो वाली ऊर्जा यिन पर भरोषा किये हुए हैं।*
दोषी हमारी बहन जी नही बल्कि आज का उनका समर्थक पुरुष समाज है। जिसमे यिन ऊर्जा की विशालता देखी जा रही है।
ऐसे मे प्रत्येक माता बहन से निवेदन क़ि अपने बच्चों व पति पिता भाई आदि मे पुरुषार्थ जगाएं। उन्हें मजबूर करें सामाजिक कार्य के लिए।
नही तो सब कुछ लूट जायेगा इस यिन ऊर्जा की बजह से।
उम्मीद है क़ि आपको कुछ बात समझ मे आई होगी।
यदि न आई हो तो आपका सशरीर स्वागत हैं।
Written by Dr Vinod Dohrey
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आपने अक्सर सुना होगा क़ि प्रत्येक व्यक्ति की सफलता मे एक महिला का योगदान जरूर होता है। बजह?????
क्योंकि महिलाओ मे यिन ऊर्जा होती है। जिसका प्रवाह बाहर से अंदर की ओर होता है। यह ऊर्जा वलयाकार होती है। जिसकी बजह से ही महिलाओ का शरीर लहरदार होता है।
यही बजह है क़ि महिलाएं extrovert ज्यादा होती हैं। इन्हें किसी की मदद करने या सेवा करने या पालन पोषण करने या किसी पर अपना सब कुछ निछावर करने की प्रवत्ति सर्वाधिक होती है। इसी बजह से माताए बहने imotional होती हैं।क्योंकि इन्हें ईश्वर ने design ही इस प्रकार किया हुआ है।
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जबकि पुरुषो मे यांग ऊर्जा होती है जो क़ि श्रजनात्मक प्रवत्ति की होती है। जो शरीर के अंदर से बाहर की तरह प्रवाहित होती है। यह ऊर्जा आयताकार या वर्गाकार होती है। इसीलिए पुरुषो के शरीर लहरदार न होकर आयात व वर्ग आकार के होते हैं।
इसी ऊर्जा के संतुलन मे कमी के कारण हमारे परिवारों मे झगड़े आपसी संबंध, स्वास्थ्य आदि खराब होते हैं।
इसकी बहुत अच्छी व प्रमाणिक गणित व भौतिक विज्ञान है आप परेशान न हो। इस ऊर्जा के वितरण व प्रकार का उदाहरण आपके हमारे कान हैं।
चूंकि महिलाओ को ईश्वर द्वारा मदद करने या पालन पोषण के लिए बनी है। इसी लिए महिलाओं मे वात्सल्य सबसे ज्यादा होता है जिसके सही उपयोग से व्यक्ति सफल होता है। तभी कहा जाता है क़ि प्रत्येक सफल व्यक्ति की सफलता के पीछे एक स्त्री जरूर होती है।
चूंकि *महिलाओं मे creativity की बजाय receptivity ज्यादा होती है। इसी ऊर्जा की बजह से वह अच्छी रणनीतिकार, भविष्यद्रष्टा व नेतृत्व कर्ता नहीं होती हैं।*
इन दोनो *ऊर्जा यिन और यांग के तालमेल मे गड़बड़ी से ही समाज मे हिजड़ा पैदा होते हैं। क्योंकि महिलाओं मे मिलने वाले xx और पुरुषो मे मिलने वाले xy गुणसूत्रों के वितरण को जो चीज नियंत्रित करती है वह कोई और नहीं बल्कि यिन और यांग ऊर्जा ही है।*
चूंकि यदि पुरुषार्थपूर्ण ऊर्जा समाज मे ज्यादा होगी तो लोग विद्रोह भी उतना ही ज्यादा व जल्दी करेगें क्योंकि वह ऊर्जा इन्शान को शांत बैठने ही नही देगी। कुछ न कुछ श्रजन करने को बाध्य जरूर करेगी।
यही *बजह है क़ि हिजड़े चाह कर भी ताली बजाने, नाचने गाने के अलावा कुछ नही कर सकते।*
इसीलिए की सत्तावर्ग की बनी बनाई व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह कोई न कर सके तभी संघियों की सुषमा स्वराज ने पोर्न वेबसाइट से प्रतिबंध हटा लिया है। ताकि लोगों मे यांग ऊर्जा न इकठ्ठी हो। बहुसंख्य लोग हिजड़ा बने रहें।
यही बजह है क़ि LGBT अर्थात हिजड़ो homosexual lezbiun gay आदि के मुद्दों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ताकि समाज मे यिन ऊर्जा की भरमार पैदा करके व्यवस्था मे जमे लोग दीर्घकाल तक अपना कब्जा जमाये रह सकें।
*चूंकि स्त्रियों / महिलाओं मे ईश्वर ने दया करुणा मैत्री कूटकूट कर भरी है, तो हम अपनी माताओ बहनों से श्रजन व संघर्ष की उम्मीद कर ही कैसे सकते हैं?*
यही बजह है क़ि जो माता बहनें दया व करुणा की अद्वितीय मिशाल हैं। वही एक महिला अर्थात बहन मायावती जी पूरे समाज को गुलाम बनवा रही हैं।
*जब यिन ऊर्जा विद्रोह कर ही नही सकती, जब यिन ऊर्जा श्रजन कर ही नही सकती तो वही यिन ऊर्जा हमे कुशल नेतृत्व कैसे प्रदान कर सकती हैं?*
यही बजह है क़ि अच्छे नेतृत्व कर्ता अक्सर ब्रह्चर्य पूर्ण पुरुष ही होते हैं। फिर चाहे वो मान्यवर कांशीराम जी हो या डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर या शिवाजी महाराज या फुले शाहेब य कबीर या नानक या भगवान बुद्ध आदि आदि आदि।
महिलाये अच्छी सहयोगी जरूर रही है। कुछ एक ने पराक्रम भी दिखाए हैं। लेकिन इन्शान मे नर ऊर्जा व मादा ऊर्जा के मौलिक योगदान व प्रभाव की बात ही दूसरी है।
*यह तो कमी यांग ऊर्जा वाले पुरुषो की है जो अपने पुरुषार्थ की बजह हिजड़ो वाली ऊर्जा यिन पर भरोषा किये हुए हैं।*
दोषी हमारी बहन जी नही बल्कि आज का उनका समर्थक पुरुष समाज है। जिसमे यिन ऊर्जा की विशालता देखी जा रही है।
ऐसे मे प्रत्येक माता बहन से निवेदन क़ि अपने बच्चों व पति पिता भाई आदि मे पुरुषार्थ जगाएं। उन्हें मजबूर करें सामाजिक कार्य के लिए।
नही तो सब कुछ लूट जायेगा इस यिन ऊर्जा की बजह से।
उम्मीद है क़ि आपको कुछ बात समझ मे आई होगी।
यदि न आई हो तो आपका सशरीर स्वागत हैं।
Written by Dr Vinod Dohrey
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