काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी इन दस व्याधियों को त्याग कर करने वाला व्यक्ति ही "दशहरा" ( दस व्याधियों का हरण करने वाला) है।
उपरोक्त दस व्याधियों के प्रभाव में रहने वाले की दसों इंद्रियां दूसरे के अधीन हो जाती है। जो व्यक्ति आपकी इन दसों इन्द्रियों को अपने नियंत्रण में कर अपने अनुसार संचालित करता है वह भी "दशहरा" कहलाता है।
वास्तव में दशहरा पूर्वरूप से स्वयं की इन्द्रियों और व्याधियों में विजय पाने का पर्व है। लेकिन राजनीति ने अपने हितों की पूर्ति करने के लिए इसके मौलिक उद्देश्यों को नष्ट कर दिया है। इसके मौलिक उद्देश्यों को समझें और "दशहरा" बने।
दशहरा / विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं।।
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