कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में विशेष - क्षण में जीना कोई कृष्ण से सीखें।
जेसपर्स की परिभाषा के अनुसार -
"Man is the promising animal."
"आदमी वचन देने वाला प्राणी है।"
मानव को क्षण में जीने वाला प्राणी होना चाहिए। वह वचन देने वाला प्राणी बनकर रह गया है। हालांकि वह मूलतः क्षण में जीता है, लेकिन सांसारिक व्यवस्था से बंधा होने के कारण इसकी अनुभूति नहीं कर पाता। उसके समक्ष जो क्षण आएगा, वैसा ही जिएगा। क्षण में अगर युद्ध आया, तो युद्ध में उतर जाएगा। क्षण में प्रेम आया तो प्रेमी बन गया। क्षण अगर करुणा आयी तो करुणा से भर जाएगा। क्षण में अगर क्रोध आया तो क्रोध से कांपेगा। क्षण में अगर अहंकार आया तो चुनौतियां देता नजर आएगा। केवल क्षण-क्षण जीने वाला आदमी ही मुक्त जी सकता है। क्योंकि जो वचन देता है। वह अतीत से बंध जाता है। जो पीछे से बंध जाता है, जो पीछे से बंधकर जीने लगता है, उसका वर्तमान और भविष्य दोनों दुख देने वाले साबित होते हैं। उसकी स्वतंत्रता रोज संकीर्ण होती चली जाती है और अतीत भविष्य पर बोझिल होने लगता है। ऐसा व्यक्ति कभी मुक्त नहीं हो सकता।
कृष्ण ऐसे आदमी नहीं हैं, जो वचन से बंधे दिखाई देते हो। क्षण में जो घटित होता है, वह उसके साथ समायोजित हो जाते हैं। हां, गांधी उनमें नजर आएंगे तो अम्बेडकर की झलक भी उनमे दिखेंगी, विवेकानंद भी दिखेंगे तो बुद्ध, महावीर और कबीर भी उनमें नजर आएंगे। वचन देने वाले प्राणी भी नजर आएंगे। लेकिन कृष्ण वचन में बंधे रहने वाले प्राणी नजर नहीं आएंगे । वह उस क्षण में जीते हैं जो अभी अभी आया हुआ है । इसीलिए यह बचन देकर कि युद्ध में शस्त्र नहीं उठाएंगे लेकिन फिर भी चक्र उठाकर युद्ध भूमि में उतर पड़ते है। चोर नहीं है फिर भी साथियों की खुशी के लिए माखन चोरी का आनन्द लेते हैं। राधा से प्रेम करने के बावजूद विवाह रुक्मणी से करते हैं। सामाजिक व्यवस्था को गंभीरता से मानने के बावजूद सुभद्रा को अर्जुन के साथ गंधर्व विवाह करने में सहयोगी बनते हैं। योद्धा हैं फिर युद्ध न करके सारथी बनते हुए। युद्ध नहीं चाहते हैं फिर भी अर्जुन को युद्ध करने के लिए प्रेरित करते हैं।ये कुछ क्षण में जीने के उदाहरण मात्र है। समग्रता से परिपूर्ण कृष्ण क्षण में जीवन जीने के उदाहरण मात्र नहीं है। वे जीवन ही है। जीवन में घुले रस है। जीवन का स्वाद लेते हैं। जीवन की कठिनाइयों से भागते नहीं है, उनके होकर उनका सामना करते हैं।
No comments:
Post a Comment