Wednesday, 23 June 2021

हर रोज बदलता रहता हूं

मैं हर रोज बदलता रहता हूं, हर पल बदलता रहता हूं।
हर रोज मैं जीता-मरता हूं। जीना मरना ही जीवन है। जीवन के इस पग में हर रोज मैं चलता रहता हूं। 
मैं हर रोज बदलता रहता हूं, हर पल बदलता रहता हूं।

मेरा बदलना ही अच्छाई है।मेरा बदलना ही बुराई है।
 कुछ लोग अच्छा  कहते हैं,कुछ लोग बुरा इसे कहते हैं। 
पर मेरा ये बदलाव ही जीवन की सच्चाई है। जीवन की इस सच्चाई में बस एक ही बात मै कहता हूं। 
मैं हर रोज बदलता रहता हूं, हर पल बदलता रहता हूं।

 अनित्य है संसार में सब कुछ। 
फिर मैं कैसे ठहर जाऊं। हर कोई ठहरे रहना चाहता है। मैं तो नित रोज बदलता रहता  हूं। 
मैं हर रोज बदलता रहता हूं, हर पल बदलता रहता हूं।

 कल जो था वह आज नहीं हूं।
जो आज हूं वह कल नहीं रह पाऊंगा। फिर कैसे कह दूं कि जो आज लिखा है वहीं कल लिख पाऊंगा। जीवन के हर पल में मैं रमता रहता हूं। 
मैं हर रोज बदलता रहता हूं, हर पल बदलता रहता हूं।

कल का लिखा आज विपरीत नजर आता है।  फिर कैसे कह दूं कि जो आज लिखा है वह विपरीत नजर नही आयेगा। इस भूत भविष्य को छोड़कर आज आगे बढ़ता रहता हूं।
मैं हर रोज बदलता रहता हूं, हर पल बदलता रहता हूं।

 स्वामी संबोधि आनंद।
23/6/2021

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