हम अक्सर अम्बेदकरवाद के नाम पर जयंतियां व अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। जो नि: संदेह प्रचार प्रसार के लिए आवश्यक है। लेकिन इससे भी जरूरी बात यह है कि हम जो भी कार्यक्रम आयोजित करते हैं उनसे जहां एक ओर हम अपने विरोधियों को सतर्क करते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करते हैं। इन कार्यक्रमों के आयोजन से हम अपना तो प्रचार प्रसार कर लेते हैं। अम्बेडकर के नाम का गुणगान तो कर लेते हैं, पर क्या हम अम्बेदकर वाद की स्थापना करने में सफल होते हैं? अम्बेदकरवाद क्या है?
व्यक्ति के अन्त:मन में समता,बन्धुत्व, स्वतंत्रता,देशहित, कर्त्तव्यबोध, व सामाजिक, आर्थिक, न्यायिक सद्भाव जागृत होना। आज हम चारों ओर देख रहे हैं कि बहुजन समाज के नवजवान बेरोजगार घूम रहे हैं, लड़कियों की शादी विवाह में भारी भरकम दहेज, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की खुली लूट , साम्प्रदायिक तनाव, आदि तेजी से पनप रहे हो तो क्या अम्बेदकरवाद अधिक दिनों तक जीवित रह सकता है? क्या हमारे जयंतियां व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर लेने मात्र से बाबा साहब अम्बेदकर का सपना पूरा हो जाएगा? एक बार फिर से हमें मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।
शैलेन्द्र कुमार बौद्ध कानपुर नगर
व्यक्ति के अन्त:मन में समता,बन्धुत्व, स्वतंत्रता,देशहित, कर्त्तव्यबोध, व सामाजिक, आर्थिक, न्यायिक सद्भाव जागृत होना। आज हम चारों ओर देख रहे हैं कि बहुजन समाज के नवजवान बेरोजगार घूम रहे हैं, लड़कियों की शादी विवाह में भारी भरकम दहेज, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की खुली लूट , साम्प्रदायिक तनाव, आदि तेजी से पनप रहे हो तो क्या अम्बेदकरवाद अधिक दिनों तक जीवित रह सकता है? क्या हमारे जयंतियां व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर लेने मात्र से बाबा साहब अम्बेदकर का सपना पूरा हो जाएगा? एक बार फिर से हमें मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।
शैलेन्द्र कुमार बौद्ध कानपुर नगर
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