इस भारत भूमि को विदेशी गुलामी से मुक्त रखने के लिए बहुजन समाज आदि काल से संघर्ष करता रहा है। इस बहुजन समाज के संघर्ष करने का अपना तरीका और त्याग रहा। इस बहुजन समाज ने इस भारत भूमि की रक्षा के लिए घर से बेघर रहा, एक एक दाने को तरसा, एक एक बूंद पानी को तरसा। इस भारत भूमि की रक्षा के लिए आज यही शूद्र समाज विदेशी व्यवस्था से लड़ रहा है। चाहे वह नक्सली आंदोलन हो या सामाजिक राजनीतिक, आर्थिक,सांस्कृतिक, शैक्षिक आंदोलन हो। हालांकि कुछ बहुजन समाज के लोग भारत भूमि के लिए आंदोलन नहीं बल्कि सुविधाओं के लिए आंदोलन कर रहे हैं। जो विदेशी और बहुजन समाज के शोषण की व्यवस्था का हिस्सा है। शूद्र समाज के लोग आखिर किस मजबूरी के चलते गंदा पानी पीने व मरे पशुओं का मांस खाने को मजबूर थे। पर वे विदेशी व्यवस्था को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। वहीं गैरशूद्र विदेशियों से मिलकर उन्हें मारने और शोषण करने के कार्य को देशभक्ति समझ रहा था। आज भी यदि हम बहुजन समाज के गरीब लोगों के मौलिक विचारों का अध्ययन करें तो वे भारत भूमि से असीम मोहब्बत झलकती है। वे भारत की प्राकृतिक संसाधनों को की रक्षा के लिए जितना संघर्षरत हैं उतना कोई नहीं है। शूद्र मरे पशुओं का भोजन व गंदा पानी,मजबूरी से अधिक स्वाभिमान के कारण, ग्रहण करते थे। यह उनका सविनय अवज्ञा आन्दोलन था। जिसे हमें समझना होगा। वे अच्छी तरह से जानते थे कि यह शरीर तो नस्वर है अगर भारत भूमि से जल जंगल जमीन समाप्त हो गये तो हमारी आने वाली पीढ़ी हमसे अधिक कष्ट में जियेगी या इसका अस्तीत्व नहीं बचेगा। उनकी यह सोच आज भी बहुजन समाज के अनुसरण कर रहे हैं। वे आज भी भारतीय संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्षरत हैं। वहीं गैर शूद्र विदेशी कम्पनियों से मिल कर भारत के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने में लगे हैं।
शूद्र समुदाय से अलग समुदाय के लोगों ने भारत भूमि को लगातार अपने निजी स्वार्थों को दृष्टिगत रखते हुए बेचने में भी देशभक्ति समझता रहा। जिस समय भारत भूमि पर अंग्रेजी कम्पनियां अपने पांव पसार रही थी, और देशद्रोही समुदाय के लोग उन विदेशी कम्पनियों को स्थापित करने के लिए उनके साथ मिलकर ठीक उसी तरह देशभक्त बहुजन समुदाय के लोगों को मारने लगा था जिस प्रकार आज नक्सलियों को, विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को स्थापित करने के लिए, देशद्रोही व विकास विरोधी बता रहे हैं। विदेशी कंपनियों को अपने देश में स्थापित करने का विरोध करने वाला देशद्रोही होगा या विदेशी कंपनियों को स्थापित करने वाला देशद्रोही होगा?
मैं उन देशभक्तों को भी इसी बलिदानी वर्ग में सम्मिलित करता हूं जो अंतरराष्ट्रीय षणयंत्र का हिस्सा आधार कार्ड का विरोध कर रहे हैं। और सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं को भीख समझ रहे हैं। मैं सलाम करता हूं ऐसे योद्धाओं को जो आधार के विरोध में संघर्षरत हैं।
शैलेन्द्र कुमार बौद्ध कानपुर नगर 9455615564
शूद्र समुदाय से अलग समुदाय के लोगों ने भारत भूमि को लगातार अपने निजी स्वार्थों को दृष्टिगत रखते हुए बेचने में भी देशभक्ति समझता रहा। जिस समय भारत भूमि पर अंग्रेजी कम्पनियां अपने पांव पसार रही थी, और देशद्रोही समुदाय के लोग उन विदेशी कम्पनियों को स्थापित करने के लिए उनके साथ मिलकर ठीक उसी तरह देशभक्त बहुजन समुदाय के लोगों को मारने लगा था जिस प्रकार आज नक्सलियों को, विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को स्थापित करने के लिए, देशद्रोही व विकास विरोधी बता रहे हैं। विदेशी कंपनियों को अपने देश में स्थापित करने का विरोध करने वाला देशद्रोही होगा या विदेशी कंपनियों को स्थापित करने वाला देशद्रोही होगा?
मैं उन देशभक्तों को भी इसी बलिदानी वर्ग में सम्मिलित करता हूं जो अंतरराष्ट्रीय षणयंत्र का हिस्सा आधार कार्ड का विरोध कर रहे हैं। और सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं को भीख समझ रहे हैं। मैं सलाम करता हूं ऐसे योद्धाओं को जो आधार के विरोध में संघर्षरत हैं।
शैलेन्द्र कुमार बौद्ध कानपुर नगर 9455615564
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