Thursday, 14 December 2017

चारों धामों की स्थापना का सच

🌺🌺🌺 *चारों धामों की स्थापना शंकराचार्य ने नहीं की यह बौद्ध विहार थे* 🌸
कहां जाता है कि राम का जन्म द्वापरयुग (5000 से7000 वर्ष पूर्व) जन्म हुआ था। उसी समय के आसपास श्रवण अपने माता-पिता को चारो धाम की यात्रा कराई थी। अगर यह बात सच मान ली जाये  तो चार धामों की स्थापना आज से सात हजार साल पहले हुई होगी‌। इसका मतलब चार धामों की स्थापना शंकराचार्य ने 788ई०मे नहीं की। इन चारों धामों की यात्रा किसी और ने की‌, अगर पांच से सात हजार वर्ष पूर्व के इतिहास को देखा जाए तो चार धामों की स्थापना शूद्रों ने की, जो सम्भवतः शिक्षा केंद्र थे।

अगर यह माना जाए कि चार धामों की शंकराचार्य ने 788 ई० में की थी तो श्रवणकुमार ने चार धामों की यात्रा नहीं कराई होगी। निश्चित ही वह प्रसिद्ध व्यक्ति होगा जिसने शूद्रों द्वारा स्थापित चिकित्सकीय स्थलों या अन्य स्थलों की यात्रा कराई होगी ताकि उसके माता-पिता की दृष्टि वापस आ जाये। श्रवण के माता-पिता अंधे कैसे हुये इसका वर्णन कहीं नहीं मिलता। अगर अनुमान व थोड़ा सा तर्क लगाया जायेगा तो मुझे लगता है कि श्रवण के माता-पिता पिता दशरथ का कुछ ऐसा राज जानते होंगे, जिसके कारण दशरथ ने उन्हें अंधा कर दिया होगा। वह राज श्रवण कुमार के प्रयासों के चलते खुल सकते थे। जिससे दशरथ को भारी नुक़सान या बदनामी हो सकती थी। इसलिए श्रवण को दशरथ ने मार दिया और श्रवण की मौत के ग़म में उसके माता-पिता भी मर गये।  इस प्रकार दशरथ के राज दब गये।

या फिर दशरथ,श्रवण, राम का जन्म 788 ई के बाद हुआ होगा। जो सम्भव नहीं लगता।
इस प्रकार राम का जन्म, श्रवण की कहानी, शंकराचार्य द्वारा चार धामों की स्थापना सब फर्जी व मनगढ़ंत है। ये चार धाम निश्चित ही शूद्रों के पवित्र बौद्ध विहार होंगे जिन्हें शंकराचार्य ने कब्जा कर लिया होगा। शैलेन्द्र कुमार गौतम कानपुर नगर

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