भारत में शिक्षा का अधिकार’ संविधान के अनुच्छेद 21A के अंतर्गत मूल अधिकार के रूप में उल्लिखित है।
2 दिसंबर, 2002 को संविधान में 86वाँ संशोधन किया गया था और इसके अनुच्छेद 21A के तहत शिक्षा को मौलिक अधिकार बना दिया गया।
इस मूल अधिकार के क्रियान्वयन हेतु वर्ष 2009 में नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right of Children to Free and Compulsory Education-RTE Act) बनाया गया। जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था।
इस अधिनियम में की धारा-25 में विद्यालय स्तर पर छात्र और शिक्षक अनुपात का प्रावधान किया गया है। यही पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत प्राप्त शिक्षा के मौलिक अधिकार का हनन कर दिया गया है।
इस धारा के अनुपालन में सरकारों द्वारा छात्र -शिक्षक अनुपात 30:1 रखा गया। यदि किसी विद्यालय में 30-60 तक छात्र है तो वहां पर न्यूनतम दो शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे।
यदि किसी विद्यालय में 50 छात्र है । जो एक से पांच कक्षा में नामांकित है। मान लो कक्षा1- में 10, कक्षा-2 में 12 कक्षा-3 में 9,कक्षा-4 में 11, कक्षा 5 में 8 छात्र है । शिक्षक दो है। मुख्य सवाल यह है कि दो शिक्षक एक साथ भिन्न भिन्न विषय पांचों कक्षा में एक समय में कैसे पढ़ा सकते हैं? यदि दो शिक्षक हैं और पांच कक्षाएं है तो क्या तीन कक्षाएं सदैव शिक्षक विहीन नहीं रहेगी? या तीन शिक्षक हैं तो दो कक्षाएं सदैव शिक्षक विहीन नहीं रहेगी?
जबकि शिक्षक छात्र का अनुपात कक्षा की संख्या के अनुसार होना चाहिए न कि विद्यालय की छात्र संख्या आधार पर । यही पर बच्चे के मौलिक अधिकार का हनन RTE ACT की धारा 25 कर रही है।
RTE ACTधारा- 27 के अनुसार शिक्षकों को आपदा, जनसंख्या और निर्वाचन से सम्बन्धित कार्यों के अलावा अन्य किसी गैर शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाया जाएगा। लेकिन मैं दस- पन्द्रह वर्षों से लगातार देख रहा हूं कि अगस्त से लेकर जनवरी तक लगातार शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी में लगाकर बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार का हनन किया जाता है। की बार इसके विरुद्ध शिक्षक संगठनों ने आवाज उठाई लेकिन निर्वाचन आयोग द्वारा प्रतिवर्ष शिक्षकों को भारी संख्या में वोटर लिस्ट के कार्य में लगा कर बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जाता है। कई बार इस कार्य का विरोध भी किया गया लेकिन RTE act की धारा 27 का हवाला देकर शिक्षकों को शिक्षण कार्य से विरत कर दिया जाता है। मैंने इसी वर्ष यह मांग की कि यदि निर्वाचन आयोग बीएलो कार्य को निर्वाचन कार्य का हिस्सा मानकर शिक्षकों को बीएलओ कार्य में लगाया जा रहा है तो जिस तरह निर्वाचन कार्य के दौरान के चुनाव कार्मिकों को बीमा और टीए डीए दिया जाता है तो उसी तरह बीएलओ ड्यूटी के दौरान यह सुविधा प्रदान की जाए। इस पर सभी अधिकारी चुप हो जाते हैं।
इस मेरा सुझाव है कि RTE ACT की 25 में यह प्राविधान किया जाए कि प्रत्येक कक्षा में कम से कम एक शिक्षक अनिवार्य हो। यदि कक्षा में 30 से ऊपर छात्र संख्या हो तो दूसरे शिक्षक की व्यवस्था की जाए।
दूसरा सुझाव शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से मुक्त रखा जाए। जिससे बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार का फायदा दिलाया जा सके।
स्वामी संबोधि आनंद
14 सितंबर 2022
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