हमारे पढ़ें लिखे, शिक्षित व नौकरी पेशा लोग, जो खुद गरीबी के दलदल से निकल कर आये हुए होंगे, इनमें से कुछ भाग्यवान होंगे जिन्होंने खुद गरीबी एहसास नहीं की होगी।
अगर इन गरीब मजदूर समाज के लोग भी नौकरी पेशा पाकर उसी तरह वैभवपूर्ण, भरपूर दान दहेज मांगकर या अपने जैसी नौकरी पेशा से विवाह करने को लालायित रहते हैं। क्या कभी इन नौकरी पेशा वाले लोगों ने इस पर ध्यान दिया कि वे भी सवर्णों की तरह पूंजीवाद के समर्थक और धनलोलुपता के चक्कर में यह भी भूल जाते हैं कि जब वे बेरोजगार थे तब कोई नौकरी पेशे वाले व्यक्ति ने अपनी कन्या का प्रस्ताव लेकर कर गया? शायद उत्तर न ही हो! उस समय उनके जीवन साथी के रूप में कोई धनाढ्य व्यक्ति अपनी लड़की को आपके पहलू में देने को तैयार नहीं था, जबकि वह इस हैसियत में था कि वह आपको कोई न कोई रोजगार करा कर अपनी लड़की को आपके पहलू पर दे सकता था। परन्तु उसने बेरोजगार हुनरमंद नवजवान के घर एक गिलास पानी पीना भी गंवारा नहीं समझा। जैसे ही गरीब मजदूर के बेटे की नौकरी लगी वैसे ही धनाढ्य व्यक्ति अपनी लड़की का रिश्ता लेकर मंडराने लगते हैं। क्या हमारे नव रोजगार प्राप्त गरीब नवजवान अपने उस अपमान को भूल गये जो चन्द सिक्कों के लालच में आकर उस व्यक्ति की लड़की को अपना जीवन साथी बनाने को तैयार हो जाते हैं जो आपके दरवाजे पर दस्तक देना तो दूर पास से निकलना गुनाह समझता था।
क्या आप भूल जाते हैं कि जो व्यक्ति अपनी लड़की के विवाह में लाखों खर्च कर करता है और भारी भरकम दहेज के खरीदकर बनियों को मजबूत करता है और आपसे कहता है कि सवर्ण बहुत बुरे होते हैं, इनसे दूरी बना कर रखो। यह व्यक्ति दान दहेज में किये गये खर्च को बचा कर आपको रोजगार की व्यवस्था कर सकता था पर उसने ऐसा नहीं किया। जैसे ही उसकी लड़की आपके घर आती तो सबसे पहले आपको आपके परिवार से अलग करने का षणयंत्र करती है और बेबस अपने जन्मदाताओं को तिरस्कृत करने को मजबूर होते हैं।
अगर किसी को कष्ट हुआ हो तो क्षमा करें
शैलेन्द्र कुमार बौद्ध ।कानपुर नगर
अगर इन गरीब मजदूर समाज के लोग भी नौकरी पेशा पाकर उसी तरह वैभवपूर्ण, भरपूर दान दहेज मांगकर या अपने जैसी नौकरी पेशा से विवाह करने को लालायित रहते हैं। क्या कभी इन नौकरी पेशा वाले लोगों ने इस पर ध्यान दिया कि वे भी सवर्णों की तरह पूंजीवाद के समर्थक और धनलोलुपता के चक्कर में यह भी भूल जाते हैं कि जब वे बेरोजगार थे तब कोई नौकरी पेशे वाले व्यक्ति ने अपनी कन्या का प्रस्ताव लेकर कर गया? शायद उत्तर न ही हो! उस समय उनके जीवन साथी के रूप में कोई धनाढ्य व्यक्ति अपनी लड़की को आपके पहलू में देने को तैयार नहीं था, जबकि वह इस हैसियत में था कि वह आपको कोई न कोई रोजगार करा कर अपनी लड़की को आपके पहलू पर दे सकता था। परन्तु उसने बेरोजगार हुनरमंद नवजवान के घर एक गिलास पानी पीना भी गंवारा नहीं समझा। जैसे ही गरीब मजदूर के बेटे की नौकरी लगी वैसे ही धनाढ्य व्यक्ति अपनी लड़की का रिश्ता लेकर मंडराने लगते हैं। क्या हमारे नव रोजगार प्राप्त गरीब नवजवान अपने उस अपमान को भूल गये जो चन्द सिक्कों के लालच में आकर उस व्यक्ति की लड़की को अपना जीवन साथी बनाने को तैयार हो जाते हैं जो आपके दरवाजे पर दस्तक देना तो दूर पास से निकलना गुनाह समझता था।
क्या आप भूल जाते हैं कि जो व्यक्ति अपनी लड़की के विवाह में लाखों खर्च कर करता है और भारी भरकम दहेज के खरीदकर बनियों को मजबूत करता है और आपसे कहता है कि सवर्ण बहुत बुरे होते हैं, इनसे दूरी बना कर रखो। यह व्यक्ति दान दहेज में किये गये खर्च को बचा कर आपको रोजगार की व्यवस्था कर सकता था पर उसने ऐसा नहीं किया। जैसे ही उसकी लड़की आपके घर आती तो सबसे पहले आपको आपके परिवार से अलग करने का षणयंत्र करती है और बेबस अपने जन्मदाताओं को तिरस्कृत करने को मजबूर होते हैं।
अगर किसी को कष्ट हुआ हो तो क्षमा करें
शैलेन्द्र कुमार बौद्ध ।कानपुर नगर
No comments:
Post a Comment