Monday, 11 November 2024

शरीर साध्य नहीं; साधन है।

अक्सर हम किसी भी व्यक्ति के कार्य को देखकर उसकी प्रसंशा, या आलोचना करते हैं। लेकिन क्या इस बात पर कभी विचार किया है कि जिस शरीर को देखकर हम प्रशंसा या आलोचना कर रहे हैं। वह कर्ता नहीं साधन है।कर्ता तो कोई और है, जो हमें कहीं नजर नहीं आता है। कौन है जो हमारे शरीर को कार्य करने का निर्देश देता है? सामान्यत: यही बता दिया जाता है कि मस्तिष्क है जो शरीर को निर्देशित करता है।‌लेकिन मामला मस्तिष्क तक ही नहीं सीमित है। कुछ और भी है जो इसमें अपनी भूमिका निभाता है। 

                    

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