Wednesday, 14 August 2019

हम मनाते मौज, गिरवी होता देश

* एक आत्मचिंतन *

लोगों में देशभक्ति की भावना दिखती है, परन्तु  है नहीं। जब सभी एक दूसरे को लूट रहे हो | तो कहाँ है देशभक्ति ? लोग किस बात की आजादी मना रहे है, जब हम अपनी भाषा, संस्कृति, संस्कार, आचरण, रहन सहन सब कुछ विदेशियों के सामने गिरवी रख दिया है।
हम किस बात की आजादी मना रहे है? जब हमने अपनी तकनीकि त्याग कर विदेशी तकनीकी को सब कुछ मान लिया है।
हम किस बात की आजादी मना रहे हैं ? जब हमारे सारे प्राकृतिक संसाधन हमारी आंखो के सामने विदेशी कम्पनियां लूटकर लिये जा रही है।
हम किस बात की आजादी मना रहे, जब लोगों को मिलने वाले रोजगार विदेशी कंपनियों और उनकी मशीनों को दिये जा रहे।
हम किस बात की आजादी मना रहे है ? जब हम अपनी नीतियां विदेशी संस्थाओं की नीतियों के प्रभाव में बना रहे है।
हम किस बात की आजादी मना रहे है.? जब    हमने अपनी मातृ भाषा को छोड़ और अंग्रेजों( जिनसे देश को आजाद कराया गया ) की अंग्रेजी से मुहब्बत करने लगे, तथा पूरी व्यवस्था अंग्रेजीमय करने में लगे है।
हम किस बात की आजादी मना रहे है जब हमारे परिधान अंग्रेजी( पश्चिमी देशों) के प्रभाव में बदल रहे है।
कैसे देश भक्त है? जो सोसल मीडिया में तो स्वतंत्रता की बधाई दे रहे है, परन्तु वास्तव में हमारे एक-एक आचरण पश्चिमी और अंग्रेजों के प्रभाव से ग्रसित है। वही पश्चिमी देश जिनसे भारत को आजाद कराने के लिए हमारे लाखों देश के सपूतों ने अपने प्राणों की आहूति दी। क्या हम फिर से उन्हीं पश्चिमी देशों के वैचारिक रूप से गुलाम नहीं हो गये।

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